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Home » Towards the end of the Red Terror | अंत की ओर लाल आतंक: 27 नक्सलियों ने हथियार डाले, दो दिन में 88 सरेंडर – Raipur News
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Towards the end of the Red Terror | अंत की ओर लाल आतंक: 27 नक्सलियों ने हथियार डाले, दो दिन में 88 सरेंडर – Raipur News

By adminOctober 16, 2025No Comments2 Mins Read
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महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली सोनू दादा उर्फ भूपति समेत 61 नक्सलियों के सरेंडर के बाद बुधवार को सुकमा जिले में भी 27 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं। इन पर करीब 50 लाख रुपए का इनाम था। इनमें दुर्दांत नक्सली हिड़मा का साथी भी शाम

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आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में 10 लाख का इनामी पीएलजीए बटालियन नंबर 1 का हेडक्वॉर्टर प्लाटून नंबर 2 सप्लाई टीम कमांडर ओयाम लखमू शामिल है। लखमू दुर्दांत नक्सली हिड़मा का साथी रहा है। आत्मसमर्पित नक्सलियों में ओयाम लखमू सहित 15 पार्टी सदस्य व 11 अग्र संगठन के सक्रिय नक्सली शामिल हैं। इनमें 10 महिला व 17 पुरुष नक्सली शामिल हैं। वहीं, उत्तर बस्तर में लंबे समय से काम कर रहे 50 नक्सलियों का जत्था बस्तर आईजी के सामने गुरुवार को सरेंडर करेंगे।

भूपति ने सीएम फडणवीस को सौंपा हथियार: सोनू दादा उर्फ भूपति ने मंगलवार को ही सरेंडर कर दिया था। लेकिन, बुधवार को गढ़चिरौली में एके-47 राइफल सीएम देवेंद्र फडणवीस को सौंपते हुए वह समाज की मुख्यधारा में शामिल हुआ।

हिड़मा कर्रेगुट्‌टा ऑपरेशन के 7वें दिन तेलंगाना भागा, 250 नक्सली भी साथ थे

प्रदीप गौतम की रिपोर्ट

आत्मसमर्पण करने वाले 27 नक्सलियों में दुर्दांत नक्सली सीसीएम हिड़मा का साथी रहा ओयाम लखमू भी शामिल है। भास्कर से बातचीत में उसने कई बड़े खुलासे किए हैं। लखमू ने बताया कि कर्रेगुट्‌टा में अप्रैल-मई में चलाए गए ऑपरेशन के दौरान हिड़मा सहित बारसे देवा, केसा, कुम्मा, छन्नू दादा, एर्रा, उधमसिंह, जग्गू दादा भी वहीं मौजूद थे।

इस दौरान 36 नक्सली के मारे गए। चूंकि तेलंगाना की तरफ जवानों की घेराबंदी कमजोर थी। ऐसे में हिड़मा ऑपरेशन के सातवें दिन 250 साथियों के साथ परपातोंग झरना होते हुए गुंजुर गांव के रास्ते तेलंगाना की ओर भाग निकला। उसने बताया कि कर्रेगुट्टा के पहाड़ों को हिड़मा अपने लिए सबसे सुरक्षित और पसंदीदा इलाका मानता है।

ये पहाड़ तेलंगाना से लगा हुआ है, जिसके कारण नक्सलियों की पनाहगाह के तौर पर यह ज्यादा सुरक्षित जगह रही है। यही वजह है कि नक्सली छत्तीसगढ़ में बड़ी वारदात को अंजाम देने के बाद या तो इस पहाड़ पर छिपते रहे हैं या इसी पहाड़ के रास्ते तेलंगाना की ओर भागते रहे हैं।



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