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देश भर में अगले महीने से एक साथ बाघों की गणना शुरू होने जा रही है। इस बार वन्यप्राणियों की गणना को लेकर एनटीसीए यानी राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने अपनी योजना में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब सिर्फ बाघों का ही नहीं, बल्कि सभी तरह के वन्यप्राणियों
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अभी तक देश भर में हर साल मुख्य रूप से बाघों की गणना पर ही फोकस किया जाता रहा है। गणना के बाद जो भी आंकड़े सामने आते थे, उनकी प्रामाणिकता को लेकर अक्सर कयास लगाए जाते थे और कई बार तो गणना पर ही प्रश्न चिन्ह लग जाते थे। यही कारण है कि केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग और बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने इस बार गणना कार्य में आवश्यक बदलाव किए हैं।
पेंच राष्ट्रीय उद्यान में हुई टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार अब न सिर्फ बाघों की गणना होगी, बल्कि सभी तरह के छोटे से छोटे वन्यप्राणियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। देश भर में गणना का काम नवंबर महीने से शुरू होकर फरवरी तक चलेगा। गणना के लिए यह चार महीने की लंबी अवधि इसलिए रखी गई है, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का असर अलग-अलग होता है।
छत्तीसगढ़ में नवंबर से जनवरी तक चलेगा काम
छत्तीसगढ़ में वन्यप्राणियों की गणना का यह काम नवंबर महीने से शुरू होकर जनवरी तक चलेगा। टाइगर रिजर्व एरिया, अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में मुख्य रूप से कैमरा ट्रैप विधि के जरिए किया जाएगा। इसके अलावा, फील्ड स्टाफ और गार्ड पैदल गश्त के दौरान पगमार्क (पंजों के निशान) तलाश कर उन्हें रिकॉर्ड करेंगे।
बिलासपुर वन वृत्त के सात वन मंडलों के साथ एटीआर और अभयारण्यों में गणना का काम नवंबर से शुरू होकर दिसंबर और जनवरी तक चलेगा। सामान्य वन मंडल क्षेत्रों में गणना का काम पुरानी पद्धति से ही किया जाएगा। इन क्षेत्रों में वन्यप्राणियों के पगमार्क को प्लास्टर ऑफ पेरिस की मदद से लिया जाएगा।
वनस्पति रिकॉर्ड करना अनिवार्य
इस बार शाकाहारी वन्यप्राणियों का क्षेत्र भी विशेष रूप से दर्ज किया जाएगा। जिस भी क्षेत्र में वन्यप्राणियों की संख्या दर्ज की जाएगी, वहां पर उस क्षेत्र में पाई जाने वाली वनस्पति की पूरी जानकारी देने के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि वह कितने बड़े क्षेत्र में फैली हुई है। इस जानकारी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि आंकड़ों की सही जानकारी।
विलुप्त हो रहे गिद्ध भी शामिल
सीसीएफ मनोज पांडेय ने बताया कि बाघ सहित अन्य वन्यप्राणियों के साथ-साथ इस बार गंभीर रूप से संकटग्रस्त गिद्ध (Vulture) को भी गणना में शामिल किया गया है। यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर है। इन्हें संरक्षित करने और इनकी संख्या को बढ़ावा देने के प्रयास के तहत यह योजना बनाई गई है।
छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या 35: प्रदेश सरकार और वन विभाग की मॉनिटरिंग रिपोर्ट के अनुसार, 2024–25 में बाघों की संख्या में सुधार देखा गया। अप्रैल 2025 की प्रारंभिक रिपोर्ट में लगभग 35 बाघों की उपस्थिति दर्ज की गई। यह बीते 3 साल की तुलना में दोगुनी है। साल 2022 में हुई गणना के अनुसार यहां 17 बाघ थे। अब सर्वाधिक 18 बाघ अचानकमार टाइगर रिजर्व में ट्रेस किए गए है, जबकि गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व में 7 बाघ देखे गए है।
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