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Home » Thymic carcinoma: a rare cancer affecting one in a million | थाइमिक-कार्सिनोमा…लाख में एक को होने वाला रेयर कैंसर: T-सेल्स इस पर नहीं करते अटैक, पढ़िए सिम्प्टम्स क्या है? मेकाहारा में सेंट्रल-इंडिया की पहली सफल सर्जरी – Chhattisgarh News
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Thymic carcinoma: a rare cancer affecting one in a million | थाइमिक-कार्सिनोमा…लाख में एक को होने वाला रेयर कैंसर: T-सेल्स इस पर नहीं करते अटैक, पढ़िए सिम्प्टम्स क्या है? मेकाहारा में सेंट्रल-इंडिया की पहली सफल सर्जरी – Chhattisgarh News

By adminOctober 11, 2025No Comments6 Mins Read
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इलाज के बाद निकले ट्यूमर का ये ग्राफिक रिप्रेंटेशन है।

8 अक्टूबर 2025 को रायपुर के मेकाहारा अस्पताल के डॉक्टरों ने ‘इंवेसिव कार्सिनोमा ऑफ थाइमस ‘ यानी ‘थाइमिक कार्सिनोमा ‘ नाम के रेयर कैंसर से पीड़ित मरीज की सफल सर्जरी की है। साइंस डायरेक्ट की रिपोर्ट के मुताबिक ये कैंसर इतना रेयर है कि एक साल में 1 लाख ल

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सेंट्रल इंडिया में इस तरह की सर्जरी पहली बार हुई है। मेकाहारा के कैंसर सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. आशुतोष गुप्ता और हार्ट सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. कृष्णकांत साहू की लीडरशिप में सर्जन्स की टीम ने लगातार पांच घंटे तक सर्जरी की है। ये कैंसर जितना रेयर है, उतनी ही इसकी सर्जरी भी जटिल है।

क्या है थाइमिक कार्सिनोमा कैंसर, क्यों होता है, इसके सिम्प्टम्स क्या है और ये क्यों इतना रेयर है, एक्सपर्ट से जानिए भास्कर एक्सप्लेनर में…

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दुनिया ने 1977 में थाइमिक कार्सिनोमा कैंसर को जाना

थाइमिक कार्सिनोमा थाइमस ग्लैंड में होता है। कंफ्यूजन न हो इसलिए ये भी जान लीजिए कि इस ग्लैंड में एक और कैंसर होता है, जिसे थाइमोमा कहते हैं। थाइमोमा सामान्य कैंसर है, कई लोगों में पाया जाता है। खासकर 50 से 60 साल की उम्र वालों को ज्यादा होता है।

लेकिन कभी-कभी कम या ज्यादा उम्र के लोगों को भी हो सकता है। धीरे-धीरे बढ़ता है। और थाइमस के अंदर ही सीमित रहता है।

लेकिन इसके उलट थाइमिक कार्सिनोमा एक एग्रेसिव नेचर का कैंसर है। बहुत रेयर है। किसी भी एज ग्रुप वालों में हो सकता है। ज्यादातर मामलों में जब तक इसका पता चलता है, तब ये थाइमस से बाहर फैल चुका होता है।

यानी शरीर के अन्य हिस्सों (जैसे फेफड़े, हड्डियों) में भी जा सकता है। इसलिए इसका इलाज कठिन होता है। 1977 में थाइमिक कार्सिनोमा कैंसर के बारे में पता चला था। थाइमोमा और थाइमिक कार्सिनोमा ये दोनों ही थाइमस एपिथेलियल ट्यूमर के प्रकार हैं।

थाइमिक कार्सिनोमा इस तरह एक ट्यूमर के तौर पर बॉडी में फैलता है। (ग्राफिकल रिप्रजेंटेंशन)

थाइमिक कार्सिनोमा इस तरह एक ट्यूमर के तौर पर बॉडी में फैलता है। (ग्राफिकल रिप्रजेंटेंशन)

बॉडी को कैंसर, इन्फेक्शन से बचाने वाला थाइमस खुद सुरक्षित नहीं

थाइमस ग्लैंड हमारे बॉडी की एक छोटी लेकिन बहुत महत्वपूर्ण ग्लैंड है। यह हमारे सीने के बीच में, दिल (हार्ट) और छाती की हड्डी (स्टर्नम/ब्रेस्टबोन) के पीछे होती है। इसका काम बॉडी में T-सेल्स बनाना और उन्हें ट्रेन करना है। ये T-सेल्स ही किसी सैनिक की तरह इन्फेक्शन, वायरस, या कैंसर सेल्स से बॉडी को प्रोटेक्ट करते हैं।

थाइमस ग्लैंड बचपन और टीनएज में सबसे ज्यादा एक्टिव रहती है, क्योंकि उसी समय हमारा इम्यून सिस्टम बनता और मजबूत होता है। एडल्ट और ओल्ड एज के होने के बीच से ग्लैंड धीरे-धीरे सिकुड़ने लगती है। और उसकी जगह फैट भर जाता है। यही कारण है कि बड़ों में यह ग्रंथि बहुत छोटी और कम सक्रिय रहती है।

रेड डॉट वाले कैंसर सेल हैं। ग्रीन सर्कल T-सेल है, जो कैंसर सेल से फाइट कर रहा है।

रेड डॉट वाले कैंसर सेल हैं। ग्रीन सर्कल T-सेल है, जो कैंसर सेल से फाइट कर रहा है।

अपने सेल्स में हुए म्यूटेशन को नहीं पहचान पाता थाइमस

अब आप ये सोच रहे होंगे जो थाइमस ग्लैंड T-सेल्स का हब है। वो खुद को कैंसर से क्यों नहीं बचा पाता? दरअसल, थाइमस T-सेल्स की फैक्ट्री तो है, लेकिन खुद भी सेल्स से बना हुआ है। जिस सेल्स से ये बना है उसका नाम है एपिथीलियल। थाइमोमा या थाइमिक कार्सिनोमा इन्हीं एपिथीलियल सेल्स के अनियंत्रित होने से बनते हैं।

होता ये है कि टी-सेल्स पूरे बॉडी में घूमकर उन सेल्स को आइडेंटिफाई और डिस्ट्रॉय करते हैं, जो बॉडी को नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन अगर कैंसर की शुरुआत थाइमस के अपने सेल्स में हो, तो टी-सेल्स उसे पहचान नहीं पाते, क्योंकि वो अपने ही ग्लैंड के सेल्स होते हैं। और बॉडी का इम्यून सिस्टम आमतौर पर अपने सेल्स पर हमला नहीं करता।

सरल भाषा में कहें तो “घर के भेदी” को T-सेल्स को पहचानने में देर हो जाती है। और ये फिर ट्यूमर के तौर पर डेवलप हो जाता है।

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अब ये समझिए थाइमिक कार्सिनोमा की सर्जरी मुश्किल क्यों होती है?

मरीज को सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ थी

कैंसर सर्जरी विभाग के HOD डॉ आशुतोष ने बताया, मेकाहारा में 35 साल का मरीज ओडिशा से आया था। उसे सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत थी। ब्लड टेस्ट, सीटी स्कैन और सोनोग्राफी की गई।

रिपोर्ट में पता चला कि पेशेंट के हार्ट के सामने स्थित चेस्ट एरिया में 11×7 सेंटीमीटर की गांठ है। जो हॉर्ट के मेजर ब्लड वेसल्स और फेफड़े से चिपकी हुई है। बायोप्सी रिपोर्ट में थाइमिक कार्सिनोमा होने की जानकारी मिली।

ऑपरेशन के बाद निकले असल ट्यूमर का से ग्राफिकल रिप्रजेंटेंशन है। असल तस्वीर से पाठक असहज महसूस कर सकते थे, इसलिए हमने AI से ये तस्वीर बनवाई है।

ऑपरेशन के बाद निकले असल ट्यूमर का से ग्राफिकल रिप्रजेंटेंशन है। असल तस्वीर से पाठक असहज महसूस कर सकते थे, इसलिए हमने AI से ये तस्वीर बनवाई है।

ट्यूमर ने अपने आस-पास के सारे स्ट्रक्चर को चपेट में लिया

इसके बाद आगे प्रोसीड करने के लिए हार्ट सर्जरी विभाग की मदद ली गई। विभाग के HOD कृष्ण कांत साहू ने बताया इस ट्यूमर ने अपने आस-पास के सभी ऑर्गन को अपने चपेट में ले लिया था। इनमें एओर्टा, जुगलर वेन, सुपीरियर वेना केवा शामिल हैं।

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एक गलत कट से पेशेंट की हो सकती थी मौत

इनमें से किसी भी स्ट्रक्चर से मामूली छेड़-छाड़ करने पर जान भी जा सकती थी। मान लीजिए एओर्टा में कट लगता तो ओवर ब्लीडिंग से मरीज की कुछ देर में ही मौत हो जाती। चीजें इसलिए हमारे लिए बहुत क्रिटिकल थीं।

हमने बहुत सावधानी से सुपीरियर वेना केवा में कट लगाया। इसके अलावा फेफड़े के एक हिस्से को भी काटना पड़ा।

ये ऑपरेशन के दौरान ली गई असल तस्वीर का ग्राफिकल रिप्रजेंटेंशन है। असल तस्वीर से पाठक असहज महसूस कर सकते थे, इसलिए हमने AI से ये तस्वीर बनवाई है।

ये ऑपरेशन के दौरान ली गई असल तस्वीर का ग्राफिकल रिप्रजेंटेंशन है। असल तस्वीर से पाठक असहज महसूस कर सकते थे, इसलिए हमने AI से ये तस्वीर बनवाई है।

सुपीरियर वेना केवा तक दिल तक पहुंचे डॉक्टर

किसी और ब्लड वेसल्स को छोड़कर सुपीरियर वेना केवा में ही कट लगाया गया क्योंकि छाती के ऊपरी हिस्से यानी मीडियास्टिनम में स्थित होती है। जोकि यह शिरा (वेन) है, इसके वॉल्स पतले और लचीले होते हैं। वेन्स में ब्लड प्रेशर बहुत कम होता है, जिसके चलते ब्लड फ्लो धीमा रहता है।

यहां से हार्ट तक पहुंचने तक सीधा रास्ता मिलता है। इसलिए कट लगाना सेफ है।

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मेडियन स्टर्नोटॉमी प्रोसीजर से की गई सर्जरी

एक्सपर्ट्स ने बताया कि मेडियन स्टर्नोटॉमी प्रोसीजर से सर्जरी की गई है। ये एक बहुत सामान्य और महत्वपूर्ण सर्जिकल प्रक्रिया है। खासकर इसका उपयोग खासकर हृदय, फेफड़ों (Lungs) और थाइमस ग्रंथि की सर्जरी में किया जाता है।

सर्जरी में शामिल अन्य मेंबर- डॉ. किशन सोनी, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. सुश्रुत अग्रवाल, डॉ. के. लावण्या, डॉ. समृद्ध, डॉ. सोनम, डॉ. अनिल। निश्चेतना विभाग से डॉ. रचना और डॉ. अविनाश।

सर्जरी में शामिल अन्य मेंबर- डॉ. किशन सोनी, डॉ. गुंजन अग्रवाल, डॉ. सुश्रुत अग्रवाल, डॉ. के. लावण्या, डॉ. समृद्ध, डॉ. सोनम, डॉ. अनिल। निश्चेतना विभाग से डॉ. रचना और डॉ. अविनाश।

मेडियन स्टर्नोटॉमी एक सर्जिकल कट होता है, जो छाती के बीचों-बीच में दिया जाता है। इसके जरिए डॉक्टर स्टर्नम (छाती की हड्डी) को बीच से काटकर खोलते हैं। ताकि अंदर के अंगों तक आसानी से पहुंचा जा सके।

आसान भाषा में बिल्कुल वैसा ही है किसी कार के बोनट को खोलकर इंजन तक पहुंचना। ताकि अंदर की मरम्मत या सर्जरी की जा सके।



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