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देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल मोड में हो रही जनगणना को साइबर अटैक और डेटा लीक से सुरक्षित रखने के लिए सरकार ने 6-लेयर सिक्योरिटी सिस्टम लागू किया है। इस व्यवस्था के तहत किसी भी परिवार का डेटा जैसे ही सुपरवाइजर के मोबाइल में ट्रांसफर होगा, वह तुरंत फील्ड में काम कर रहे जनगणना कर्मी के मोबाइल से स्वत: डिलीट हो जाएगा। इसी तरह सुपरवाइजर जब डेटा मेन सर्वर पर अपलोड करेंगे, तो उनके मोबाइल से भी पूरी जानकारी हट जाएगी। यानी किसी भी स्तर पर डेटा मोबाइल में स्थायी रूप से उपलब्ध नहीं रहेगा। 1 मई से शुरू होने वाले पहले चरण में मकानों की लिस्टिंग की जाएगी। इसके लिए ‘नो लोकल स्टोरेज’ मॉडल अपनाया गया है। जनगणना कर्मी घर-घर जाकर मोबाइल एप में 33 बिंदुओं पर जानकारी दर्ज करेंगे। डेटा एंट्री के दौरान उन्हें मोबाइल का इंटरनेट बंद रखना होगा। एक या कुछ घरों की जानकारी पूरी करने के बाद जैसे ही वे नेटवर्क ऑन करेंगे, डेटा सीधे सुपरवाइजर के मोबाइल में पहुंच जाएगा और उसी समय उनके फोन से हट जाएगा। इसके बाद सुपरवाइजर इसे मेन सर्वर पर अपलोड करेंगे, जहां यह स्थायी रूप से सुरक्षित रहेगा। अधिकारियों के अनुसार, इस सिस्टम का उद्देश्य डेटा लीक के जोखिम को न्यूनतम करना है। यदि किसी डिवाइस तक अनधिकृत पहुंच भी हो जाए, तब भी उसमें नागरिकों की निजी जानकारी उपलब्ध नहीं होगी। अपलोड के बाद कर्मियों के मोबाइल पर केवल इतना दिखेगा कि उनके जिम्मे कितने परिवारों की गणना बाकी है। हर कर्मी के जिम्मे 200 परिवार, रोज 20 की एंट्री का लक्ष्य रखा प्रत्येक जनगणना कर्मी को औसतन 200 परिवारों का जिम्मा दिया गया है। प्रशिक्षण में उन्हें प्रतिदिन कम से कम 20 परिवारों का डेटा अपलोड करने का लक्ष्य बताया गया है। इसके लिए सभी कर्मियों के मोबाइल में विशेष एप इंस्टॉल कराया गया है और इसके सुरक्षित उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया गया है। जनगणना का दूसरा चरण फरवरी में प्रस्तावित है, जिसमें परिवार के सदस्यों का विस्तृत ब्योरा लिया जाएगा। 6 लेयर का सुरक्षा घेरा, हर गतिविधि पर नजर
डेटा को किसी दूसरे मोबाइल या डिवाइस में मैन्युअली ट्रांसफर करने का विकल्प नहीं होगा। {नेटवर्क ऑन होते ही डेटा स्वतः ही आगे ट्रांसफर हो जाएगा। {मोबाइल में रिकॉर्ड नहीं रहेगा। {एक्सेस केवल अधिकृत लॉगिन के जरिए ही संभव होगा। {अंतिम स्टोरेज सरकारी सुरक्षित सर्वर पर होगा। {डेटा लीक होने का खतरा नहीं। ऑनलाइन सिस्टम के बावजूद किसी भी परिवार का व्यक्तिगत डाटा लीक होने का खतरा नहीं है। इसका क्लाउड सिस्टम अलग है। फील्ड में काम करने वालों के पास लिमिटेड एक्सेस रहेंगे। वे जैसे ही नेट ऑन करेंगे डेटा ट्रांसफर हो जाएगा। -कार्तिकेय गोयल, जनगणना निदेशक छत्तीसगढ़
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