कांकेर के चारामा पूर्व जनपद अध्यक्ष और आदिवासी नेता जीवन ठाकुर की मौत मामले में कांग्रेस ने न्यायिक जांच की मांग की है। प्रदेश कांग्रेस ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि, यह मौत सामान्य नहीं, बल्कि सरकार की प्
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उनका आरोप है कि भाजपा सरकार विरोधी नेताओं को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेज रही है। वहां प्रताड़ित कर उनकी आवाज को हमेशा के लिए दबाने की कोशिश कर रही है। जीवन ठाकुर आदिवासी अधिकारों की लड़ाई में हमेशा मुखर रहे। यही वजह थी कि सरकार उन्हें रास्ते से हटाना चाहती थी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने आरोप लगाया है कि, जेल के भीतर जीवन ठाकुर को गंभीर यातनाएं दी गईं, इलाज में लापरवाही बरती गई और इन्हीं परिस्थितियों के कारण उनकी मौत हुई। कांग्रेस ने मांग की है कि, कांकेर के जेलर और सभी जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज।
आदिवासी नेताओं को फर्जी मामलों में जेल भेजा गया
दीपक बैज का आरोप है कि, पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में आदिवासी नेताओं को फर्जी मामलों में जेल भेजा गया है। कई आदिवासी फर्जी एनकाउंटर में मारे गए और जल-जंगल-जमीन की लड़ाई लड़ने वाले हर आदिवासी को सरकार निशाना बना रही है।
उन्होंने कहा कि, कॉर्पोरेट हितों की रक्षा के लिए भाजपा सरकार ने आदिवासी समाज के खिलाफ अघोषित डेथ वारंट जारी कर दिया है। सरगुजा से लेकर बस्तर तक पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में पेसा कानून का उल्लंघन लगातार हो रहा है। उसके खिलाफ उठने वाली आवाजों को सरकारी दमन का सामना करना पड़ रहा है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि, जीवन ठाकुर की मौत सरकार के हिंसक रवैये की ताज़ा मिसाल है। उन्होंने मांग की है कि, पूरे मामले की न्यायिक जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, अन्यथा कांग्रेस प्रदेशभर में आंदोलन करेगी।

जीवन ठाकुर को कांकेर जेल से रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया।
4 दिसंबर को हुई थी आदिवासी नेता की मौत
कांग्रेस नेता और सर्व आदिवासी समाज के पूर्व जिला अध्यक्ष जीवन ठाकुर की मौत 4 दिसंबर को हुई। उन्हें 12 अक्टूबर 2025 को कांकेर पुलिस ने फर्जी वन पट्टा बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। 49 वर्षीय जीवन ठाकुर को 2 दिसंबर को कांकेर जिला जेल से रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था, जहां उनकी तबीयत अचानक बिगड़ी।
उन्हें मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां सुबह करीब 8 बजे उनकी मौत हो गई। जीवन ठाकुर की मौत से पूरे आदिवासी समाज में रोष है। परिजनों ने 36 घंटे तक अंतिम संस्कार नहीं किया और जेल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही, जानकारी छिपाने और हत्या का आरोप लगाया। चारामा पुलिस थाने में इस संबंध में शिकायत भी दर्ज कराई गई है।
कांकेर सहायक जेल अधीक्षक रेणु ध्रुव का कहना है कि, 4 दिसंबर की सुबह 4 बजे जीवन ठाकुर को अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि परिजनों का कहना है कि उन्हें मौत की सूचना शाम 5 बजे दी गई। विधायक सावित्री मंडावी ने मामले की गहन जांच की मांग की है, वहीं आदिवासी नेता सुमेर सिंह नाग और गौतम कुंजाम ने चेतावनी दी है कि उचित कार्रवाई न होने पर समाज आंदोलन करेगा।
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