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शिक्षा संस्थान डाइट में 8 से 12 दिसंबर तक विषय-आधारित ब्लूप्रिंट, प्रश्न पत्र निर्माण एवं शिक्षण शास्त्र पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण में जिले के 7 डीआरजी (जिला स्त्रोत समूह) और 32 बीआरजी (विकासखंड स्त्रोत समूह) प्रतिभागियों को विस्तृत रूप से प्रशिक्षित कर रहे हैं। तीसरे दिन विभिन्न विषयों के 32 बीआरजी ने सहभागिता की। प्रशिक्षण के दौरान सीखने के उपयुक्त वातावरण पर डीआरजी डालेश्वरी साहू ने कहा कि सही वातावरण ही वह कुंजी है, जो किसी विद्यार्थी में जिज्ञासा, रुचि और गहरी समझ को विकसित करता है।
सुरक्षित, प्रेरक और भयमुक्त वातावरण में विद्यार्थी स्वतंत्र होकर प्रश्न पूछते हैं, समाधान खोजते हैं और अपने विचार प्रकट करते हैं। नई शिक्षा नीति 2020 भी विद्यार्थी-केंद्रित और भयमुक्त सीखने के वातावरण पर विशेष बल देती है। उन्होंने सीखने के भौतिक, मानसिक, सामाजिक, भावात्मक और बौद्धिक वातावरण की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डीआरजी धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि किसी भी कार्य को व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक ढंग से करने के लिए बनाई गई पूर्व योजना को ब्लूप्रिंट कहा जाता है। यह तय करता है कि किस अध्याय से किस प्रकार के प्रश्न आएंगे, उनकी कठिनाई का स्तर क्या होगा। समय एवं अंक भार का वितरण किस प्रकार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संतुलित प्रश्न पत्र निर्माण, संपूर्ण पाठ्यक्रम को वाजिब महत्व, सीखने के प्रतिफल का सही मापन और छात्रों को समान अवसर उपलब्ध कराने में ब्लूप्रिंट की बड़ी भूमिका होती है। साथ ही उन्होंने ब्लूम टैक्सोनॉमी ज्ञान, समझ, अनुप्रयोग, विश्लेषण, मूल्यांकन और सृजन के स्तरों की भी व्याख्या की।
प्राचार्य जेके घृतलहरे ने बताया कि प्रशिक्षण का तीसरा चरण पूर्ण किया जा रहा है। विकासखंड स्तर पर शिक्षकों का प्रशिक्षण 15 से 31 दिसंबर के बीच अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। ताकि बोर्ड परीक्षाओं से पूर्व समस्त शिक्षक प्रशिक्षित हो सकें। कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता जीएल खुटियारे द्वारा किया गया। आयोजन में जिला स्त्रोत समूह के प्रशिक्षक के रूप में केजहा राम निषाद, रवि चौहान, धर्मेंद्र शर्मा (अंग्रेजी), गीतांजलि निषाद, डालेश्वरी साहू, लक्ष्मीनारायण गायकवाड, संजय चंतारे प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। विकासखंड स्त्रोत समूह में रमेश वर्मा, चंद्रकांत दुबे, मनीषा चौबे, नेहा ठाकुर, डॉ. प्रियंका वर्मा, कीर्तनाथ साहू, मनोज बारले सहित अन्य सदस्यों ने भी इस कार्य में सहभागिता दी।
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