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राज्य के सरकारी स्कूलों में ऑनलाइन सिस्टम बढ़ने के साथ शिक्षकों की परेशानी भी बढ़ गई है। विभाग की ओर से बार-बार नए एप डाउनलोड करने के निर्देश दिए जा रहे हैं, लेकिन इसके लिए शिक्षकों को सरकारी मोबाइल नहीं दिया गया। मजबूरी में शिक्षक अपने निजी मोबाइल प
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संघ के प्रदेश अध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि ऑनलाइन कार्य के लिए शिक्षकों को सरकारी मोबाइल या टैबलेट नहीं दिया गया। निजी मोबाइल से काम कराने से शिक्षकों की व्यक्तिगत जानकारी, बैंक डिटेल और फोटो-वीडियो लीक होने का खतरा है। टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षकों के नंबर कई व्यावसायिक क्षेत्रों तक पहुंच चुके हैं, जिससे फ्रॉड और ब्लैकमेलिंग की आशंका है। शासन से सरकारी मोबाइल और व्यवस्था की मांग की है।
एक्सपर्ट व्यू – मुकेश चौधरी, आईटी एक्सपर्ट
डेटा कहां स्टोर हो रहा, यह देखना भी जरूरी
सरकार अगर कोई एप्लीकेशन इंस्टाल करवा रही है तो ध्यान देना चाहिए कि डेटा किस देश में स्टोर किया जा रहा है। शिक्षकों को ये सावधानी बरतनी चाहिए। एप्लीकेशन को तभी परमिशन दें जब उसे इस्तेमाल करना हो। कम समय के लिए उपयोग करना हो तो उपयोग के बाद एप्लीकेशन को अनस्टॉल कर लें। मोबाइल के जरिये अगर इंटरनेट बैंकिंग कर रहे हैं तो ये एप मिस यूज नहीं कर सकती। लेकिन ये ध्यान रखें कि किसी पिक्चर गैलेरी में क्रेडिट या डेबिट कार्ड की फोटो या पासवर्ड की फोटो खींचकर सेव न करें। किसी भी जरूरी दस्तावेज या एटीएम या डेबिट कार्ड की फोटो सेव न रखें। उसका गलत इस्तेमाल हो सकता है।
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