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छत्तीसगढ़ में सरकार की महत्वाकांक्षी योजना हमर क्लीनिक चार साल बाद भी अधूरे हैं। दरअसल, गली-मोहल्लों तक स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने की योजना तो शुरू कर दी गई, लेकिन कई जगह न डॉक्टर हैं और न ही दवाई मिल रही है। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस
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छत्तीसगढ़ के लिए कुल 1799 करोड़ रुपए के लिए जारी हुए थे। साल 2021-22 में सीजीएमएससी को 339 करोड़ रुपए मिले। 2022-23 में 339 में से 101 करोड़ रुपए मिले। इसके बाद से 2023-24 और 2024-25 में काम ही नहीं दिखा पाए इसलिए पैसे जारी नहीं हुए। एक केंद्र में करीब 27 लाख रुपए खर्च किया गया है। बाकी के लिए फंड रुकने से नए निर्माण और पुराने कार्य दोनों पर असर पड़ा है।
रायपुर के 70 वार्डों में 84 क्लीनिक बनने थे, लेकिन अब तक सिर्फ 52 वार्डों में ही काम पूरा हो पाया है। 32 वार्डों में या तो निर्माण अधूरा है या शुरू ही नहीं हो सका। जिन वार्डों में हमर क्लीनिक बन चुके हैं, वहां लोगों को प्राथमिक सुविधा मिल रही है। ब्लड प्रेशर, शुगर की जांच, सामान्य दवा और परामर्श की व्यवस्था है।
रायपुर-बिलासपुर के 50 से ज्यादा हमर क्लीनिक से भास्कर लाइव
इलाज के नाम पर औपचारिकता, डॉक्टर, जांच-दवाई सब गायब
दैनिक भास्कर की टीम ने बिलासपुर के चार हमर क्लीनिक की पड़ताल की। कहीं छोटे से हॉल में सिर्फ दो-तीन लोगों के बैठने की कुर्सी है, तो कहीं वह भी नदारद है। हमर क्लीनिक डूमार समाज के जर्जर सामुदायिक भवन में चल रहा है। यहां सीपेज के कारण बारिश में दवाइयां भीग जाती हैं। बैठने के लिए ठीक से कुर्सियां नहीं हैं। वहीं, गोड़पारा हमर क्लीनिक में अधूरी सुविधाओं और डॉक्टर की गैर मौजूदगी के कारण, मोहल्ले के लोग इन क्लीनिकों में जाने के बजाय इलाज के लिए सिम्स अस्पताल में ही भीड़ के बीच धक्के खाते नजर आते हैं।
2BHK मकान में क्लीनिक फार्मासिस्ट कर रहा इलाज
मठपारा में कैलाशपुरी के पास हमर क्लीनिक 2 बीएचके मकान में चल रहा है। डॉक्टर और नर्स दोनों नदारद मिले। फार्मासिस्ट ही मरीजों की बात सुनकर दवाई दे रहा था। मरीजों ने बताया कि कई दिनों से डॉक्टर नहीं आ रहे, पूरा इलाज फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है।
सिर्फ 1 नर्स के भरोसे सामुदायिक केंद्र…यहां न डॉक्टर न फार्मासिस्ट
देवेंद्र नगर में एफसीआई गोदाम के सामने स्थित सामुदायिक भवन में केंद्र संचालित हो रहा है। यहां न तो डॉक्टर हैं, न फार्मासिस्ट, न ही फोर्थ ग्रेड कर्मचारी। यहां एक नर्स मरीजों को अटेंड कर रही है। वही जांच भी कर रही है और वही दवाई भी दे रही है। पता चला कि यहां के डॉक्टर कहीं और पोस्टेड है।
त्रिमूर्ती नगर: दूसरे जगह कर दी डॉक्टर की पोस्टिंग, अब कमरे में लगा ताला
त्रिमूर्ति नगर के एक सामुदायिक भवन में क्लीनिक है। ऊपर के कमरे में आंगनबाड़ी है। नीचे दो कमरों में क्लीनिक है। इनमें एक डॉक्टर का कमरा है, जो बंद पड़ा है। दूसरे में एक स्टाफ नर्स बैठती है। कमरा पूरा दवाइयों और सामान से भरा हुआ है। मरीजों के बैठने के लिए एक बेंच है। पूछने पर पता चला कि यहां एक एनएम और एक स्टाफ नर्स है। फोर्थ ग्रेड, डॉक्टर और एएसए की पोस्टिंग कहीं और कर दी गई है।
सीधी बात
रितेश अग्रवाल, एमडी, सीजीएमएससी
शहर में 84 क्लीनिक खुलने थे, 52 ही क्यों खुल पाए हैं?
– फंड की कमी है, इसलिए काम रुक गया है।
कब तक बनेंगे सभी क्लीनिक?
– फंड स्वीकृत होते ही क्लीनिकों का काम शुरू हो जाएगा।
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