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नवंबर के तीसरे सप्ताह में विधानसभा का शीतकालीन सत्र होने की संभावना है। तीन से पाँच दिन के होने वाले इस सत्र का पहला दिन पुराने भवन में विदाई सत्र के रूप में आयोजित करने की तैयारी है। जबकि सत्र के शेष दो से चार दिन की कार्यवाही नए भवन में करने की योज
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दरअसल, दो दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों विधानसभा के नए भवन का नवा रायपुर में लोकार्पण किया गया है, लेकिन अभी भी यह बिल्डिंग पीडब्ल्यूडी के अधीन है। इसे विधानसभा कार्यालय को हैंडओवर नहीं किया गया है। थोड़ा-बहुत काम बचा हुआ है, उसे पूरा करने के बाद ही नए भवन में शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू होगी।
विधानसभा के अधिकारियों-कर्मचारियों को शिफ्टिंग के दौरान सिर्फ फाइलें, ज़रूरी दस्तावेज़ और लाइब्रेरी की सामग्री लाने के लिए कहा गया है। जबकि अन्य सभी चीजें नए भवन में उन्हें उपलब्ध कराई जाएंगी।
ग्रीन बिल्डिंग कांसेप्ट पर भवन तैयार
यह भवन पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल और हरित निर्माण तकनीक से बनाया गया है। परिसर में सोलर प्लांट के साथ वाटर हार्वेस्टिंग के लिए दो तालाब भी बनाए जा रहे हैं। भवन में पर्यावरण-संरक्षण के सभी मापदंडों का पालन किया गया है। विधानसभा में 500 दर्शक क्षमता वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम और 200 सीटर सेंट्रल हॉल बनाया गया है। भवन की वास्तुकला आधुनिकता और पारंपरिक शैलियों का उत्कृष्ट मेल है।
आरकेसी से अब नए रायपुर तक का सफर
छत्तीसगढ़ के इतिहास में राज्य स्थापना दिवस यानी 1 नवंबर के दिन से एक नया अध्याय जुड़ गया है। साल 2000 में राज्य गठन के बाद रायपुर के राजकुमार कॉलेज से शुरू हुई छत्तीसगढ़ विधानसभा को 25 साल (रजत जयंती वर्ष) में अपना भव्य और आधुनिक स्थायी भवन मिल गया है।
धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ की पहचान को इस भवन की वास्तुकला में बखूबी पिरोया गया है। सदन की सीलिंग पर धान की बालियों और पत्तियों को उकेरा गया है, जो प्रदेश की कृषि-प्रधान संस्कृति का प्रतीक है। भवन के ज्यादातर दरवाजे और फर्नीचर बस्तर के पारंपरिक काष्ठ शिल्पियों द्वारा बनाए गए हैं।
पेपरलेस होगी पूरी वर्किंग
नए विधानसभा भवन को वर्तमान और भविष्य की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। यह पूरी तरह सर्वसुविधायुक्त और सुसज्जित भवन है, जिसके सदन को 200 सदस्यों तक के बैठने के लिए बढ़ाया जा सकता है। पेपरलेस विधानसभा संचालन के लिए आवश्यक तकनीकी सुविधाओं को शामिल किया जा रहा है, जिससे यह भवन ‘स्मार्ट विधानसभा’ के रूप में विकसित होगा।
बताया गया है कि सभी सदस्यों के टेबल पर एक-एक टैब भी लगाया जाएगा, जिससे उन्हें प्रश्नावली के साथ विधानसभा की अन्य सभी जानकारी उसमें मिल जाएगी।
324 करोड़ से 51 एकड़ में बना
नवा रायपुर के 51 एकड़ में फैले इस परिसर का निर्माण 324 करोड़ की लागत से किया गया है। भवन को तीन मुख्य हिस्सों विंग-ए, विंग-बी और विंग-सी में बांटा गया है। विंग-ए में विधानसभा का सचिवालय, विंग-बी में सदन, सेंट्रल हॉल, मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का कार्यालय तथा विंग-सी में मंत्रियों के कार्यालय स्थित हैं।
तीन करोड़ जनता की आकांक्षाओं का प्रतीक छत्तीसगढ़ की संस्कृति और शिल्प से सजे-संवरे इस नए विधानसभा भवन में राज्य के तीन करोड़ नागरिकों की उम्मीदें, आकांक्षाएं और आत्मगौरव साकार होता दिखेगा।
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