लोकसभा के शून्यकाल में गुरुवार (11 दिसंबर) को छत्तीसगढ़ में ऑनलाइन धोखाधड़ी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में सरकार का ध्यान बढ़ते साइबर ठगी ट्रेंड ‘डिजिटल अरेस्ट’ की ओर खीचा।
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सांसद अग्रवाल ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों की पूरी जीवनभर की कमाई कुछ ही मिनटों में उड़ा दी जा रही है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन लुटेरे अब पुलिस अफसर बनकर वीडियो कॉल करते हैं, वर्दी में दिखाई देते हैं और फर्जी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करा लेते हैं।
सांसद अग्रवाल ने सदन में कहा कि डिजिटल अरेस्ट के इस गिरोह की चपेट में सबसे ज्यादा बुजुर्ग, अकेले रहने वाले लोग और तकनीक से अनभिज्ञ वर्ग आ रहा है।
ऐसे पीड़ितों से लुटेरे उनकी बचत, रिटायरमेंट फंड और फिक्स्ड डिपॉजिट तक एक झटके में निकलवा लेते हैं। उन्होंने इसे “बहुत बड़ी चोरी” बताते हुए कहा कि देशभर में असंख्य लोग इसके शिकार बन चुके हैं। सांसद अग्रवाल ने साइबर ठगों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति बनाने की मांग रखी है।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने संसद में उठाया डिजिटल ठगी का मुद्दा।
सांसद बृजमोहन ने दिए ये सुझाव
- “यदि किसी बैंक खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर होती है तो उसकी 50% राशि को कम से कम 24 घंटे के लिए होल्ड कर दिया जाए।” उनके अनुसार, यह सुरक्षा-व्यवस्था ऑनलाइन लूट को काफी हद तक रोक सकती है और पीड़ितों को पैसा बचाने के लिए समय मिल सकता है।
- सांसद ने कहा कि जिस तेजी से डिजिटल फ्रॉड का दायरा बढ़ रहा है, सरकार को भी उसी रफ्तार से तकनीकी सुरक्षा बढ़ानी होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि बुजुर्गों और आम लोगों को इस साइबर जाल से बचाना अब बेहद जरूरी हो गया है, क्योंकि ऑनलाइन लुटेरे मिनटों में लोगों की पूरी जिंदगी की कमाई चट कर रहे हैं।

डिजिटल अरेस्ट के मामले तेजी से बढ़े
सांसद अग्रवाल ने बताया कि हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ में इस तरह के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिसमें छात्र, कारोबारी और वरिष्ठ नागरिक तक निशाना बन रहे हैं।
उन्होंने कहा, “डिजिटल इंडिया के इस दौर में साइबर सुरक्षा जनता का पहला अधिकार है। ठगों पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।”
सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि मंत्रालय इस विषय पर विस्तृत रिपोर्ट लेकर आएगा और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
3,000 करोड़ से ज्यादा की ठगी
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर चेतावनी देते हुए कहा कि डिजिटल फ्रॉड के मामलों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। उनके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट भी ‘डिजिटल अरेस्ट’ को उभरती हुई गंभीर चुनौती मान चुका है। उन्होंने बताया कि सिर्फ भारत में सीनियर सिटीजंस समेत हजारों पीड़ित अब तक 3,000 करोड़ से ज्यादा गंवा चुके हैं।

संसद में मुद्दा उठाने के बाद सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सोशल मीडिया में ये पोस्ट किया है।
इस प्रक्रिया में तत्काल सुधार की मांग – बृजमोहन
बृजमोहन के अनुसार समस्या तब और गंभीर हो जाती है, जब डर और धमकी के माहौल में पीड़ित कुछ ही मिनटों में अपनी उम्रभर की बचत का 80 प्रतिशत –90 प्रतिशत तक रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा बैंकिंग सिस्टम ऐसे मामलों को सामान्य ट्रांजैक्शन की तरह प्रोसेस कर देता है, जबकि इस प्रक्रिया में तत्काल सुधार की आवश्यकता है।
छत्तीसगढ़ में डिजिटल अरेस्ट करके 32 करोड़ ठगे
छत्तीसगढ़ में पिछले 3 सालों के दौरान डिजिटल अरेस्ट की आड़ में ऑनलाइन ठगी के 40 से ज्यादा गंभीर मामले उजागर हुए हैं, जिनमें लगभग 32 करोड़ रुपए की फर्जीवाड़े की पुष्टि हो चुकी है।
इसके अलावा कुछ घटनाएं ऐसी भी सामने आई हैं, जिन पर औपचारिक अपराध दर्ज नहीं हुआ है, मगर शिकायतों के आधार पर जांच जारी है। रायपुर, बिलासपुर, भिलाई और राजनांदगांव जैसे बड़े शहरों में बड़ी तादाद में लोग साइबर ठगों का शिकार बने हैं।

डिजिटल अरेस्ट करने वाले आरोपियों को पकड़कर मीडिया के सामने पेश करते हुए पुलिस अधिकारी।
अब तक 35 से ज्यादा आरोपी पुलिस ने पकड़े
डिजिटल अरेस्ट केस में साइबर सेल और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीम ने अब तक 35 से अधिक ठगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
ये गिरोह खुद को केंद्रीय एजेंसियों या पुलिस अफसर बताकर लोगों को फर्जी केस में फंसाने की धमकी देते थे। इसके बाद ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर पीड़ितों से उनके बैंक खातों से भारी रकम ट्रांसफर करा लेते थे।
साइबर सेल और स्थानीय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पकड़े गए ये आरोपी गुजरात, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मध्यप्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ के कई जिलों से गिरफ्तार किए गए हैं।
डिजिटल अरेस्ट से बचाव के तरीके
- सबसे पहले नेशनल साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर करें काल।
- साइबर धोखाधड़ी से जुड़े हर तरह के सबूत को एकत्रित करके रखें।
- ठगी होने के बाद एक से तीन घंटे के भीतर शिकायत करें, पैसे मिलने की संभावना।
- 1930 पर काल नहीं उठाने पर साइबर क्राइम की वेबसाइट पर रिपोर्ट करें।
- मोबाइल में अनजाने लिंक पर ना करें क्लिक और ना ही करें एप डाउनलोड।
- अनजान नंबर से काल आने पर घबराएं नहीं, ब्लाक कर दें या काल को काट दें।

साइबर ठग डिजिटल अरेस्ट करके पीड़ितों से सेटेलमेंट के नाम पर ठगी करते है।
ठगी का शिकार होने पर कहां करें शिकायत…
- साइबर क्राइम के मामले में शिकार होने पर सबसे पहले नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर सेल से संपर्क करें। वहां अपनी शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा भी अपनी शिकायत सरकार और पुलिस तक पहुंचा सकते हैं। इसके 2 तरीके हैं-
- cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत करें। शिकायत दर्ज कराने के लिए पोर्टल पर उपलब्ध वाणी चैट बोट की मदद ले सकते हैं।
- साइबर फाइनेंशियल क्राइम हेल्पलाइन नंबर 155260 के जरिए भी शिकायत कर सकते हैं।
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