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प्रदेश के सबसे बड़े सराफा मार्केट सदर बाजार में कारोबारी राहुल गोयल को बंधक बनाकर 86 किलो चांदी के जेवर लूट लिए गए। दो नकाबपोश लुटेरे आधी रात करीब 3 बजे कारोबारी के घर पहुंचे। कारोबारी का नाम लेकर दरवाजा खटखटाया।
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कारोबारी ने जब दरवाजा खोला तो लुटेरों ने कट्टा तान दिया। उसके मुंह में रूमाल रख दिया और कारोबारी को कमरे के भीतर ले जाकर रस्सी से बांध दिया। लुटेरों ने जेवर दो बैग में भरे और बालकनी से रस्सी के सहारे नीचे उतरकर भाग गए। लुटेरे डीवीआर भी साथ ले गए। सुबह 10 बजे कारोबारी को होश आया तो किसी तरह हाथ खोलकर पड़ोसी के घर गए और घटना की जानकारी दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है।
कारोबारी ने बताई कहानी– दो नकाबपोश घर में घुसे, विरोध किया तो चाकू से हमला किया
मैं मूल रूप से अलीगढ़ (यूपी) का रहने वाला हूं। रायपुर में मेरी शिवा ट्रेडर्स नामक कंपनी है। मैं आगरा की एक कंपनी के सीएफए के रूप में चांदी के जेवर लेकर रायपुर आता हूं और कारोबारियों को बेचता हूं। इसके एवज में मुझे प्रति किलो 500 रुपए कमीशन मिलता है। दिवाली के लिए मैं 200 किलो चांदी लेकर रायपुर आया था।
उसमें से 100 किलो चांदी वापस आगरा भिजवा दिया। वहीं 14 किलो चांदी की बिक्री हो चुकी थी, जबकि 86 किलो चांदी का ऑर्डर बाकी था। शुक्रवार रात 11 बजे मैं भोजन कर सो गया। रात करीब 3 बजे दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनकर नींद खुली। बाहर आया तो किसी ने मेरा नाम पुकारा और दरवाजा खोलने को कहा।
मेरे पड़ोस में दो कारोबारी आगरा के ही हैं। मैंने सोचा कि वे होंगे और दरवाजा खोल दिया। बाहर दो नकाबपोश खड़े थे, जिनमें से एक भीतर आया और सीधे कट्टा तान दिया। मैंने विरोध किया तो दूसरे नकाबपोश ने चाकू से हमला किया और मुंह को रूमाल से दबा दिया। रूमाल में अजीब सी गंध आ रही थी और मैं बेहोश हो गया।
सुबह 10 बजे आंख खुली तो मेरे हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए थे। किसी तरह खुद को छुड़ाकर बाहर आया और पड़ोसी को घटना बताई। लुटेरे बालकनी से रस्सी के सहारे नीचे उतरकर भाग गए। डीवीआर भी साथ ले गए। – जैसा कि कारोबारी राहुल गोयल ने भास्कर को बताया।
घटना को लेकर संशय… क्योंकि सीसीटीवी फुटेज नहीं मिला और फुटप्रिंट भी नहीं, चाकू के निशान नहीं, डॉग भी भटका
इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी के साथ क्राइम ब्रांच और फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम मौके पर पहुंची। सीसीटीवी कैमरे से अब तक कोई फुटेज नहीं मिला। कई कैमरे बंद मिले हैं। फ्लैट में फुटप्रिंट या फिंगरप्रिंट भी नहीं मिले। डॉग फिर भटक गया। पड़ोसियों ने भी न किसी की आवाज सुनी और न ही किसी को भागते देखा।
भास्कर एक्सपर्ट – अन्वेष मंगलम, स्पेशल डीजी रिटायर्ड
कारोबारी की शिकायत पर पुलिस को बिंदुवार और तकनीकी जांच करनी चाहिए। फॉरेंसिक जांच के साथ फ्लैट के हर रास्ते और जगह की स्कैनिंग जरूरी है। जहां घटना बताई गई है, वहां से फिंगर और फुटप्रिंट लिए जाएं। कारोबारी के मोबाइल की टेक्निकल एनालिसिस की जाए। यह भी जांच हो कि कारोबारी की रेकी पहले से की गई थी या नहीं।
संभावना है कि वारदात किसी ऐसे व्यक्ति ने की हो जो कारोबारी को अच्छी तरह जानता हो। उसे पता था कि डीवीआर कहां है, कितने जेवर हैं और कारोबारी अकेले रहता है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में कुछ सवाल ऐसे हैं जो केस को उलझाते हैं-
- अगर कारोबारी के हाथ-पैर रस्सी से बंधे थे तो निशान जरूर आएंगे।
- पेट में चाकू से हमला किया गया है तो टी-शर्ट फटी होगी, सिर्फ खरोंच नहीं आ सकती।
- लुटेरे अगर दरवाजे से अंदर आए तो बालकनी से क्यों भागे?
- उन्हें कैसे पता था कि अपार्टमेंट का पूरा सीसीटीवी सिस्टम बंद है?
- पड़ोसियों ने कारोबारी की चीख या आवाज क्यों नहीं सुनी?
- क्या कारोबारी सचमुच 7 घंटे तक बेहोश रहा, इसकी जांच जरूरी है।
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