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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने कहा है कि परिवार न्यायालय केवल विवादों के निराकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संबंधों की रक्षा कर पुनर्मिलन को भी प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने यह बात रविवार को विवेकानंद सभागार में आयोजित परिवार
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यह बैठक छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा मुख्य न्यायाधीश एवं अकादमी के मुख्य संरक्षक के मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी। इसमें परिवार न्यायालयों के न्यायाधीश, काउंसलर्स, सामाजिक कल्याण एजेंसियों और अन्य संबंधित अधिकारी एक मंच पर एकत्र हुए।
मुख्य न्यायाधीश सिन्हा ने वर्चुअल माध्यम से बैठक का उद्घाटन करते हुए समाज की सबसे संवेदनशील इकाई परिवार की रक्षा में परिवार न्यायालयों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ये न्यायालय भावनात्मक आघात को कम करने में भी सहायक होते हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि परिवार न्यायालयों में कार्य करते समय विधिक ज्ञान के साथ-साथ सहानुभूति, धैर्य और मानवीय व्यवहार की समझ आवश्यक है। इससे न्यायाधीशों, काउंसलर्स, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समर्थन एजेंसियों का एक संवेदनशील एवं सहायक तंत्र विकसित होता है।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस बैठक का उद्देश्य केवल चुनौतियों की समीक्षा करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि परिवार न्यायालय से सहायता मांगने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सम्मानपूर्वक और समयबद्ध न्याय प्राप्त हो।
काउंसलर्स और एजेंसियों की सराहना
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि परिवार मामलों का निपटारा जितनी संवेदनशीलता से किया जाएगा, उतना ही परिवार मजबूत होकर उभरता है। यदि मामले ठीक ढंग से नहीं सुलझाए गए, तो परिवार और अधिक टूट सकता है।
उन्होंने काउंसलर्स और सामाजिक कल्याण एजेंसियों की भी सराहना की। उनके हस्तक्षेप ने कई जटिल परिस्थितियों में परिवार में रिश्तों को फिर से जोड़ने में मदद की है।
अपने संबोधन में उन्होंने लंबित मामलों, अधोसंरचना की कमी, विशेषज्ञ प्रशिक्षण की जरूरत और घरेलू हिंसा, बाल अभिरक्षा, भरण-पोषण, गोद लेने और संरक्षकता जैसे बढ़ते और जटिल मामलों पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने सभी संबंधित पक्षों के बीच बेहतर समन्वय और लगातार कौशल विकास पर जोर दिया।
चीफ जज ने कहा- बच्चों के कल्याण को हमेशा प्राथमिकता दें
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा ने सभी प्रतिभागियों से अपील की कि परिवार न्यायालय को ऐसा मंच बनाया जाए जहाँ विवादों का समाधान न्याय, सम्मान और संवेदनशीलता के साथ हो, और बच्चों के हित हमेशा सबसे पहले रखे जाएँ।
कार्यक्रम में न्यायमूर्ति रजनी दुबे, न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा, अमितेन्द्र किशोर प्रसाद, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश तथा रणबीर सिंह मरहास, अतिरिक्त महाधिवक्ता, छत्तीसगढ़ राज्य, विषय विशेषज्ञ के रूप में मौजूद रहे।
बैठक में छत्तीसगढ़ शासन के प्रमुख सचिव (विधि एवं विधायी कार्य विभाग), उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, अन्य रजिस्ट्री अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सदस्य सचिव और अन्य अधिकारी भी शामिल हुए। स्वागत भाषण छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन अतिरिक्त निदेशक ने प्रस्तुत किया।
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