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बिलासपुर नगर निगम की स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर-1 बनने की तैयारी अधूरी रह गई। सर्वेक्षण टीम ने शहर का दौरा कर लिया है, लेकिन चार तरह के कचरे को अलग-अलग इकट्ठा करने के लिए न तो पर्याप्त डस्टबिन उपलब्ध हैं और न ही चार कंपार्टमेंट वाले कचरा वाहन। इससे शहर में कचरा प्रबंधन की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार के नए निर्देशों के तहत शहर में 1.29 लाख मकानों और दुकानों तक चार रंगों वाले डस्टबिन नहीं पहुंचे हैं। इसके अलावा, चार कंपार्टमेंट वाले कचरा वाहनों की संख्या भी पर्याप्त नहीं है। निगम के दावों के विपरीत, जमीनी हकीकत कमजोर नजर आ रही है। कचरे को ‘गीला कचरा, सूखा कचरा, घरेलू खतरनाक कचरा और सैनिटरी वेस्ट’ जैसी चार श्रेणियों में अलग-अलग रखना अनिवार्य किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कचरे का वैज्ञानिक निपटान सुनिश्चित करना, रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देना और पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करना है। प्रस्ताव को नहीं मिली स्वीकृति अधिकारिक जानकारी के अनुसार, 1.29 लाख डस्टबिन की खरीद के लिए 10 करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया है। चार कंपार्टमेंट वाले कचरा वाहनों की संख्या बढ़ाने के लिए भी एक अलग प्रस्ताव है। वर्तमान में, शहर में केवल 25 चार कंपार्टमेंट वाली कचरा गाड़ियां हैं, जबकि 70 वार्डों वाले नगर निगम के लिए इनकी संख्या बढ़ाने की आवश्यकता है। इस प्रस्ताव को अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है। हालांकि, डस्टबिन बांटने से पहले लोगों को कचरा अलग-अलग इकट्ठा करने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है। नए नियमों के मुताबिक, कचरे का पृथक्करण घरों से ही शुरू होना चाहिए, लेकिन बिलासपुर में इसकी तैयारी अभी भी अधूरी है। अधिकांश वार्डों में अभी भी केवल गीला और सूखा कचरा ही एकत्र किया जा रहा है, जिससे पूर्ण पृथक्करण का लक्ष्य दूर है। संसाधन ही नहीं, नई योजना जमीन पर कैसे उतरेगी निगम लगातार लोगों से घरों में अलग-अलग डस्टबिन रखने और कचरा अलग कर देने की अपील कर रहा है। लेकिन जब तक चार श्रेणियों के अनुरूप डस्टबिन और जरूरी संसाधन ही उपलब्ध नहीं होंगे, तो नई व्यवस्था जमीन पर कैसे उतरेगी? संग्रहण की पूरी व्यवस्था ही बदलनी पड़ेगी वर्तमान में अधिकांश कचरा गाड़ियों में दो हिस्सों में ही कचरा संग्रहित किया जाता है। चार प्रकार के कचरे के पृथक संग्रहण के लिए वाहनों में अलग-अलग सेक्शन विकसित करने या नई व्यवस्था लागू करने की जरूरत होगी। इसके बाद ही कचरे को सही तरीके से प्रोसेसिंग यूनिट तक पहुंचाया जा सकेगा। शहर में फिलहाल अधिकांश घरों में दो डस्टबिन की ही व्यवस्था है और लोग उसी आधार पर कचरा अलग कर रहे हैं। अफसरों के घर में भी दो डस्टबिन स्थिति यह है कि नगर निगम के अफसरों और कर्मचारियों के घरों से भी अभी दो डस्टबिन के माध्यम से ही कचरा निकल रहा है। ऐसे में आम लोगों से चार प्रकार का कचरा अलग करने की अपेक्षा करने से पहले निगम को अपनी व्यवस्था मजबूत करनी होगी। खरीदी का प्लान बन रहा- मेयर महापौर पूजा विधानी ने कहा कि, डस्टबिन खरीदी का प्लान बन रहा है। एमआईसी में प्रस्ताव आने के बाद खरीदी की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। निगम के स्वास्थ्य विभाग को सभी कचरा गाड़ियों में चार कंपार्टमेंट बनाने कहा गया है, ताकि लोग चार अलग-अलग तरह का कचरा उसमें डाल सकें। नंबर 1 के लिए दावा मजबूत- कश्यप नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी और डिप्टी कमिश्नर प्रवेश कश्यप के मुताबिक प्रथम चरण का स्वच्छता सर्वेक्षण कर टीम जा चुकी है। अगले चरण में ओडीएफ और बीएफसी के लिए सर्वे होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण में नंबर 1 के लिए बिलासपुर का दावा मजबूत है और संसाधन के मुताबिक तैयारी पूरी की गई। उन्होंने बताया कि सिटी 2.0 के अंतर्गत कचरा इकट्ठा करने के लिए 60 से 90 गाड़ियों का प्रस्ताव भेजा गया है, इनके आने से और बेहतर सफाई होगी। नगर निगम स्वत: की टीम के जरिए चार तरह का कचरा अलग अलग इकट्ठा कर रही है।
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