छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत घुमका ब्लॉक में बोटेपार से खजरी तक की लगभग ढाई किलोमीटर लंबी सड़क ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बन गई है।कागजों में यह सड़क पूरी हो चुकी है, लेकिन जमीनी हकीकत में यह पूरी तरह जर्जर है
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इस मामले में विधानसभा में दिए PWD मंत्री अरूण साव के जवाब पर भी सवाल उठ रहे हैं। जिसमें उन्होंने कहा है कि सड़क चलने योग्य है। ग्रामीणों ने कहा है कि यह सड़क सालों पहले केवल गिट्टी और मुरूम डालकर छोड़ दी गई थी, अब ये यहां गड्ढे ही गड्ढे है।

27 दिसंबर को विधायक सड़कों का हाल देखने पहुंची।

ग्रामीण बोले- सड़क की हालत खराब, फिसलने से पैर टूटा।
इस रास्ते में सड़क कभी बनी ही नहीं – ग्रामीण
ग्रामीण नारायण वर्मा के अनुसार, लगभग 20-25 साल पहले जब बोटेपार और खजरी एक ही पंचायत थे, तब इस पर गिट्टी-मुरूम डलवाया गया था, लेकिन उसके बाद से कोई स्थायी निर्माण कार्य नहीं हुआ है। समय के साथ यह रास्ता पूरी तरह जर्जर हो गया है।
ग्रामीण चंद्रशेखर वर्मा के मुताबिक, यह मुरूम गिट्टी वाला रास्ता था। कभी सड़क बनी ही नहीं। बारिश में तो कोई जा ही नहीं सकता। इस रास्ते में हम किसान भाई बहुत त्रस्त है।
ग्रामीण बोले- सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बने
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं, जिससे रोजाना दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी खराब हो जाती है, जब गड्ढों में पानी भर जाने से सड़क का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीण सुशीला बाई ने बताया कि इसी सड़क पर फिसलने से उनका पैर टूट गया था, जिसके कारण उन्हें दो महीने तक बिस्तर पर रहना पड़ा।
इस सड़क की बदहाली का सबसे अधिक असर किसानों पर पड़ रहा है। बोटेपार के किसान अपनी धान की फसल बेचने के लिए लगभग 6 किलोमीटर दूर पटेवा सोसाइटी जाते हैं।
खराब सड़क के कारण ट्रैक्टर ले जाना जोखिम भरा होता है, इसलिए उन्हें घुमका होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। इससे उनके समय, ईंधन और मेहनत का नुकसान होता है।

ग्रामीणों के मुताबिक, यह सड़क कभी बनी ही नहीं। बारिश में हालत खराब हो जाते है।

रास्ता क्लीयर नहीं होने से आए दिन हादसे होते है।

विधानसभा के शीतकालीन सत्र में उठा मुद्दा।
PWD मंत्री साव बोले – सड़क चलने योग्य है
यह मामला विधानसभा तक भी पहुंचा। डोंगरगढ़ विधायक हर्षिता बघेल ने सड़क निर्माण को लेकर सदन में सवाल उठाया था। उन्होंने सवाल पूछा कि बोटेपार से खजरी मार्ग बजट में शामिल था। स्वीकृति के बाद टेंडर होने के बाद आज ये राशि कहा लंबित है।
जवाब में PWD मंत्री अरूण साव ने कहा कि विधायक ने जिन 3 सड़कों का उल्लेख किया है। निविदा हो गया था। निविदा की प्रक्रिया लंबित है। सड़कों का मरम्मत किया गया है। ये सड़क चलने योग्य है और कागजों में इसे पूरा बताया गया है।
आने वाले समय में सड़कों की नवीनीकरण की आवश्यकता होगी तो निश्चित रूप से उस पर काम करेंगे।
विधायक ने कहा सड़क चौड़ीकरण की स्वीकृति मिली थी। राशि जारी होने के बाद रोक दिया गया है। विभाग में यदि राशि है तो काम होना चाहिए। इसे रोका क्यों गया।

छपरा गांव के प्रभावितों ने सड़क निर्माण की मांग की है।
सड़क निर्माण की मांग
हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में बनी सड़क और जमीन की सच्चाई में बड़ा अंतर है। ग्रामीणों के अनुसार, सरकार के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा विरोधाभास है। बोटेपार-खजरी के लोग आज भी एक सुगम सड़क के इंतजार में हैं। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग की है।

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