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Home » Teachers are busy with apps and portals instead of teaching, and the massive ID generation has become a new problem. | शिक्षक पढ़ाने के बजाय ऐप और पोर्टल में उलझे, अपार आईडी जनरेशन बना नई परेशानी – Raipur News
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Teachers are busy with apps and portals instead of teaching, and the massive ID generation has become a new problem. | शिक्षक पढ़ाने के बजाय ऐप और पोर्टल में उलझे, अपार आईडी जनरेशन बना नई परेशानी – Raipur News

By adminOctober 28, 2025No Comments3 Mins Read
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जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षण कार्य अब तकनीकी औपचारिकताओं के बोझ तले दबता जा रहा है। शिक्षकों का अधिकांश समय अब कक्षाओं के बजाय मोबाइल और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बीत रहा है। अध्यापन की मूल जिम्मेदारी निभाने के बजाय शिक्षक दिनभर शासन और शिक्षा व

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शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्राथमिक से लेकर हायर सेकंडरी स्कूलों तक लगभग 36 ऐप्स और पोर्टल सक्रिय हैं। इन पर शिक्षकों, संस्था प्रमुखों और बीआरसीसी को प्रतिदिन, साप्ताहिक या मासिक आधार पर जानकारी दर्ज करनी होती है। नेटवर्क समस्या, बार-बार लॉगिन फेल होना, सर्वर डाउन रहना, पासवर्ड बदलने की झंझट जैसी तकनीकी दिक्कतों के कारण यह कार्य और भी जटिल हो गया है। जिले में कुल 1,426 शासकीय स्कूल संचालित हैं, जिनमें 5 लाख 27 हजार 33 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

अपार आईडी बना नई चुनौती शिक्षक डेटा एंट्री में उलझे

शिक्षा विभाग द्वारा विद्यार्थियों को डिजिटल पहचान (Apar ID) देने के उद्देश्य से “अपार आईडी” योजना शुरू की गई है। जिले में 5 लाख 27 हजार विद्यार्थियों के लिए अपार आईडी बनाना अनिवार्य किया गया है। लेकिन अब तक केवल 3 लाख 65 हजार विद्यार्थियों की अपार आईडी ही तैयार हो पाई है। शिक्षकों का कहना है कि एक अपार आईडी बनाने में कई बार दो से तीन बार जानकारी दोहराकर भरनी पड़ती है, क्योंकि पोर्टल बार-बार एरर दिखाता है या डेटा सेव नहीं होता।

उत्कर्ष अभियान और मूल्यांकन कार्य का भी बढ़ा दबाव

राज्य सरकार ने विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर को बढ़ाने के लिए उत्कर्ष अभियान शुरू किया है। इसके तहत हर माह विद्यार्थियों की परीक्षा लेकर मूल्यांकन किया जाता है, जिससे उनकी प्रगति का पता लगाया जा सके। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि जब वे दिनभर ऐप्स और पोर्टलों में डेटा एंट्री, अपलोडिंग और रिपोर्टिंग में लगे रहते हैं, तो विद्यार्थियों को पढ़ाने का समय ही नहीं बचता।

मोबाइल हैकिंग और डेटा चोरी का खतरा

छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शर्मा ने बताया कि अधिकांश ऐप्स शिक्षक अपने व्यक्तिगत मोबाइल से ही संचालित करते हैं। इससे मोबाइल हैकिंग, निजी जानकारी लीक होने और बैंक विवरण चोरी होने का खतरा लगातार बना रहता है। कई ऐप्स बैंक अकाउंट, आधार, पैन और वेतन संबंधी विवरण मांगते हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं।

शिक्षा विभाग के प्रमुख ऐप्स और पोर्टल

शिक्षा विभाग द्वारा उपयोग किए जा रहे प्रमुख ऐप्स में निष्ठा ऐप, दीक्षा ऐप, टीएमए ऐप, निक्लर ऐप, मिशन एलओसी, कोचिंग मैप, एनपीएस ऐप, एएसपी ओटीआर ऐप, विद्यांजलि ऐप, उल्लास ऐप, गुरुशाला ऐप, इकोषलाइट्स, डीजीलॉकर ऐप, वीएसके ऐप, ई-जादुई पिटारा ऐप, एसएचवीआर ऐप, यूट्यूब, टेलीग्राम और गूगल शीट्स शामिल हैं। इसके अलावा ऑनलाइन पोर्टलों में एजुकेशन पोर्टल 2.0 और 3.0, समग्र शिक्षा पोर्टल, सीजीबीएससी पोर्टल, छात्रवृत्ति पोर्टल, यूडाइस प्लस, इकोक्लब पोर्टल आदि हैं, जिन पर शिक्षकों को विभिन्न रिपोर्ट, परीक्षाफल, मूल्यांकन और उपस्थिति संबंधी रिकॉर्ड अपडेट करना होता है।

शिक्षा की गुणवत्ता और सुधार के लिए समय-समय पर मॉनिटरिंग का आवश्यक है, इसलिए शिक्षकों द्वारा जानकारी दी जाती है। हमारा प्रयास रहता है कि यह जानकारी कम से कम समय में उपलब्ध कराई जाए, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो। – हिमांशु भारतीय, डीईओ, रायपुर



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