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कवर्धा विकासखंड के 17 शासकीय स्कूलों में एक साथ स्मार्ट क्लास सुविधा मंगलवार से शुरू हुआ। यह शिक्षा के डिजिटलीकरण की दिशा में जिले की अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। आने वाले दिनों में बोड़ला व सहसपुर लोहारा ब्लाक के स्कूलों में भी
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मंगलवार को इसका शुभारंभ ग्राम बिरकोना के उच्चतर माध्यमिक शाला से उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि और सरस्वती वंदना से की। इसके बाद उन्होंने स्मार्ट क्लास की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया और शिक्षकों से इसकी तकनीकी संरचना एवं उपयोग की जानकारी ली। छात्रों के साथ बैठकर डिजिटल बोर्ड के माध्यम से हृदय की संरचना, पौधों में पादप हार्मोन और प्रकाश के अपवर्तन पर आधारित थ्रीडी एनिमेटेड कंटेंट भी देखा।
उन्होंने खुद स्मार्ट बोर्ड संचालित कर छात्रों से संवाद किया और कहा कि अब शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अनुभव और तकनीक के मेल से बच्चों का ज्ञान अधिक गहरा होगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना केवल उपकरणों की उपलब्धता नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में परिवर्तन की शुरुआत है। थ्रीडी विजुलाइजेशन और इंटरएक्टिव लर्निंग से कठिन विषय भी छात्रों के लिए अब रोचक और सरल हो सकेंगे। इस तकनीक से छात्र जटिल अवधारणा को सजीव रूप में देख सकेंगे और प्रयोगात्मक रूप से समझ पाएंगे।
3डी इमर्सिव लर्निंग शिक्षा में नई दिशा: डिजिटल युग में 3डी इमर्सिव लर्निंग शिक्षा का चेहरा बदल रही है। यह तकनीक छात्रों को जटिल अवधारणाओं को विजुअल रूप में समझने और अनुभव करने का अवसर देती है। आभासी वास्तविकता (वीआर), संवर्धित वास्तविकता (एआर) और मिश्रित वास्तविकता (एमआर) के प्रयोग से छात्र विज्ञान, गणित या भूगोल जैसे विषयों को 3डी मॉडल और सिमुलेशन के जरिए सजीव रूप में देख सकते हैं। इससे पढ़ाई केवल किताबों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अनुभवात्मक और रोचक बन जाती है। यह तकनीक दृश्य, श्रवण और क्रियात्मक सभी शिक्षण शैलियों को जोड़ती है, जिससे हर विद्यार्थी अपनी गति से सीख सकता है।
साथ ही यह रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता बढ़ाती है। 3डी लर्निंग मॉड्यूल छात्रों को एक सुरक्षित, यथार्थवादी वातावरण में वास्तविक परिस्थितियों का अनुभव कराते हैं।
कठोर परिश्रम ही सफलता का एकमात्र मार्ग: विजय उपमुख्यमंत्री ने कहा कि कठोर परिश्रम ही सफलता का एकमात्र मार्ग है। किसी लक्ष्य तक पहुंचने का कोई शॉर्टकट नहीं होता। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि प्रत्येक विद्यालय में विषयवार साप्ताहिक शैक्षणिक शेड्यूल तैयार किया जाए और डिजिटल वीडियो लाइब्रेरी विकसित की जाए। साथ ही एक स्कूल को दूसरे स्कूल से जोड़कर ज्ञान एवं अनुभव विनिमय तंत्र तैयार करने की बात कही, जिससे छात्रों में प्रतिस्पर्धात्मक और सहयोगात्मक वातावरण बने। जिले के 44 विद्यालयों में शेड निर्माण की स्वीकृति दी जा चुकी है।
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