कोंडागांव जिले के 30 मत्स्य कृषकों को आधुनिक मत्स्य पालन की तकनीकों का तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। 7 से 9 अक्टूबर तक शासकीय मत्स्य बीज प्रक्षेत्र कोपाबेड़ा में आयोजित इस कार्यक्रम में कृषकों को झींगा बीज का वितरण भी किया गया। कलेक्टर नूपुर राशि
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प्रशिक्षण के दौरान मत्स्य पालन विशेषज्ञ योगेश कुमार देवांगन ने कृषकों को तालाब की तैयारी, मछली बीज के चयन, संचयन विधि, आहार प्रबंधन और रखरखाव की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक पद्धति से झींगा पालन करने पर कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य कृषकों को आधुनिक मत्स्य पालन के लिए प्रोत्साहित करना है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हों। यह कार्यक्रम किसानों को उन्नत तकनीकों से परिचित कराकर उनकी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।

कोंडागांव में कृषकों को झींगा पालन का प्रशिक्षण
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन के मत्स्य पालन विभाग द्वारा बस्तर संभाग में झींगा पालन को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में संभाग के सात जिलों में लागू किया गया है, जिसका लक्ष्य क्षेत्र में झींगा उत्पादन को बढ़ाना है।
इसी कड़ी में कोंडागांव जिले के चयनित 30 कृषकों को 7 से 9 अक्टूबर तक यह तीन दिवसीय प्रशिक्षण प्रदान किया गया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में इन कृषकों को झींगा बीज वितरित किए गए, जिससे वे तुरंत झींगा पालन शुरू कर सकें।

झींगा की बढ़ती मांग ने खोले किसानों के लिए रोजगार के नए रास्ते
झींगा, जिसे सामान्य भाषा में चिंगड़ी या फ्रेश वाटर प्रॉन भी कहा जाता है, एक उच्च प्रोटीन युक्त जलजीव प्रजाति है। बाजार में इसकी कीमत 400 से 500 रुपये प्रति किलोग्राम तक होती है। देश और विदेश दोनों जगह इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, जो इसे एक मूल्यवान उत्पाद बनाती है।
झींगा पालन को मत्स्य पालन का एक अत्यधिक लाभकारी विकल्प माना जा रहा है। यह कृषकों को कम जगह और सीमित संसाधनों का उपयोग करके भी अच्छी आमदनी अर्जित करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकता है।
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