एमसीबी जिले के मनेन्द्रगढ़ में शारदीय नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिरों व पंडालों में सुबह से ही माता के भक्तों की कतारें देखने को मिली। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से मां की पूजा
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तिथियों में बदलाव के कारण पांचवें स्वरूप की पूजा छठे दिन हो रही है। एक ओर जहां ज्यादातर पंडालों में सप्तमी से माता विराजती हैं वहीं दो ऐसे पंडाल रेलवे लोको कॉलोनी व रेलवे कॉलोनी है जहां पूरे नौ दिनों तक माता विराजती हैं। इस दौरान क्षेत्र में गरबा उत्सव की भी धूम रही, जिसमें श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मनेंद्रगढ़ शहर में गरबा को लेकर लोगों में उत्साह है।

मां स्कंदमाता की पूजा
शास्त्रों के अनुसार, मां स्कंदमाता भक्तों पर अपने पुत्र के समान स्नेह बरसाती हैं। उनकी कृपा से नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं और साधक को जीवन में मनचाही सफलता तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत दिव्य है; वे शेर पर विराजमान रहती हैं और उनके चार हाथ हैं। उनकी गोद में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) बालरूप में विराजित हैं।
मंदिर पुजारी रामकृष्ण महराज ने बताया कि स्कंदमाता की पूजा से पहले सूर्योदय से पूर्व स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। मां की प्रतिमा को गंगाजल से स्नान कराकर कुमकुम, रोली, पुष्प, फल, पान का पत्ता, लौंग, इलायची और श्रृंगार सामग्री अर्पित की जाती है।
इसके बाद मां के समक्ष धूप और दीप प्रज्वलित कर अंत में उनकी आरती उतारी जाती है। यह विधि मां स्कंदमाता को प्रसन्न करने का सर्वोत्तम तरीका माना गया है।

शहर में कई जगह गरबा का आयोजन
शारदीय नवरात्र में माता की अलग-अलग पूजन के साथ देर रात तक गरबा का आयोजन भी किया जा रहा है। क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के बावजूद लोग माता की भक्ति में झूमते नजर आए। जिला मुख्यालय मनेन्द्रगढ़ में कई संगठनों और सामाजिक समितियों द्वारा गरबा का आयोजन किया जा रहा है।
बीती रात पैराडाइज प्रांगण में आयोजित गरबा के दौरान काफी संख्या में लोग पहुंचे। यहां गरबा के दौरान बारिश भी बाधा नहीं पहुंचा पाई और महिलाएं व बच्चे देवी गीतों पर खूब झूमे।
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