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चर्चा नहीं होगी, अब समर्पण के अलावा नक्सलियों के पास कोई विकल्प नहीं
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बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में शामिल हुए केंद्रीय गृहमंत्री
छत्तीसगढ़ दौरे के दूसरे दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शनिवार को जगदलपुर पहुंचे। यहां बस्तर दशहरा के सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम मुरिया दरबार में शामिल हुए। उन्होंने मांझी और मुखियाओं से बात कर उनकी समस्याएं सुनी। 75 दिन चलने वाले 650 साल से ज्यादा पुराने दशहरा में यह पहला मौका था, जब देश के गृहमंत्री ने हिस्सा लिया हो।
इस दौरान शाह ने नक्सलियों के सफाए पर अपनी डेडलाइन को दोहराते हुए कहा कि 31 मार्च 2026 की तारीख याद रखें। इसके बाद कोई नक्सली नहीं बचेगा, क्योंकि नक्सलियों से अब चर्चा नहीं होगी। उनके पास हथियार डालना ही विकल्प है।
बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में मांझी-मुखिया, चालाकियों से मुलाकात की। फिर लालबाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेले में आमसभा को संबोधित किया। केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने कहा कि 31 मार्च 2026 से पहले बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद का खात्मा कर दिया जाएगा।
इस तारीख के बाद नक्सली बस्तर के विकास में बाधा नहीं बन पाएंगे। 31 मार्च 2026 के बाद बस्तर में नक्सलवाद नहीं, बल्कि केवल विकास होगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी अपने गांव के भटके युवाओं को समझाएं कि वे हथियार डाल दें और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाएं।
अब भी समय है, नक्सली अपने हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दें और इलाके के साथ देश के विकास में सहभागी बनें। अब भी नहीं माने तो 31 मार्च 2026 के बाद कोई नक्सली नहीं बचेगा। पुलिस और सुरक्षा बल के जवान लगातार नक्सलियों को न्यूट्रलाइज करने पर काम कर रहे हैं, जिसमें काफी सफलता भी मिली है।
हथियार न डालने वाले नक्सलियों को आने वाले समय में फोर्स के जवान ही जवाब देंगे। स्टेट प्लेन से सीएम साय और डिप्टी सीएम विजय शर्मा के साथ मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट पर लैंड हुए। यहां सबसे पहले माईं दंतेश्वरी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। फिर बस्तर दशहरा की प्रमुख रस्म मुरिया दरबार में शामिल होने पहुंचे। इसके बाद लालबाग मैदान में आयोजित स्वदेशी मेले में आमसभा को संबोधित किया।
शाह का ऐलान व ऑपरेशन के मायने
लालबाग मैदान से नक्सलवाद खात्मे को लेकर अमित शाह ने कड़ा संदेश दे दिया है। उन्होंने कहा है कि विकास के अलावा सरकार किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार नहीं है। कुछ लोग वार्ता की बात कह रहे हैं, लेकिन सरकार अब कोई वार्ता नहीं करेगी। नक्सलियों को हथियार छोड़कर यानी आत्मसमर्पण करने के बाद सामने आना होगा और वार्ता करनी होगी।
इसके मायने ये हैं कि अब सरकार ने 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तक नक्सलवाद को खत्म करने कमर कस चुकी है। 1 जनवरी 2024 से लेकर अब तक जहां बड़े पैमाने पर ऑपरेशन चलाकर कई सीनियर कैडर के नक्सलियों को जवानों ने न्यूट्रलाइज किया है, उससे साफतौर पर ये समझा जा सकता है कि आने वाले इन 6 महीनों में मिशन 2026 को किस तरह से जवान ऑपरेट करेंगे।
ऐसा माना जा रहा है कि किसी भी स्थिति में अब सरकार नक्सलवाद के खात्मे का निश्चय कर चुकी है। केंद्रीय गृहमंत्री के बीते तीन बस्तर दौरे में जिस तरह से अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे का ऐलान किया है और मैदानी स्तर पर जवानों के ऑपरेशन चल रहे हैं, उससे अब ये साफ हो चुका है कि जवान मिशन 2026 को पूरा करके ही अब दम लेंगे।
250 गांवों को जोड़ने वाले 34 रूटों पर बस सेवा
शाह ने प्रदेश के 250 गांवों को जोड़ने वाले 34 रूटों पर बस सेवा शुरू की। सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर व सरगुजा में बस सेवा नहीं होने से लोगों को पिकअप सहित अन्य गाड़ियों से जान जोखिम में डालकर यात्रा करनी पड़ती है।
इन हालातों में मुख्यमंत्री बस सेवा योजना की शुरूआत की गई है, जिसे 34 रूटों पर चलाया जाएगा। इसमें बस संचालक को होने वाले नुकसान की क्षतिपूर्ति राज्य सरकार देगी। शाह ने महतारी वंदन योजना के तहत 1.87 लाख महिलाओं के खातों में 606.94 करोड़ की राशि ट्रांसफर की। बस्तर दशहरा पर जारी किए गए पिक्टोरियल पोस्टकार्ड का विमोचन भी शाह ने किया।
अब तक 7 बार वार्ता के लिए नक्सली लिख चुके हैं पत्र
- 26 मार्च को पहली बार पत्र लिखा।
- 17 अप्रैल को दूसरा पत्र जारी किया।
- 25 अप्रैल को तीसरा पत्र सामने आया।
- 10 मई को चौथा पत्र जारी किया गया।
- 6 जुलाई को पांचवां पत्र सामने आया।
- 17 सितंबर को छठवां पत्र।
- 28 सितंबर को सातवां पत्र जारी किया।
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