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छत्तीसगढ़ प्राइवेट स्कूल मैनेजमेंट एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेशभर के निजी स्कूल 1 मार्च से असहयोग आंदोलन पर हैं। 4 अप्रैल को संगठन ने निर्णय लिया कि RTE के तहत लॉटरी से आबंटित वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। 17 अप्रैल को शिक्षकों और संचालकों ने काली पट्टी लगाकर विरोध किया, जबकि 18 अप्रैल को स्कूल बंद रखे गए। इस आंदोलन के तहत आज विभिन्न जिलों के निजी स्कूलों ने डाक के माध्यम से स्कूल शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजा। संगठन का आरोप है कि विभाग उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा है और मांग की अनदेखी की जा रही है।
संगठन ने बताया कि 24 अप्रैल को प्रदेशभर में जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी समस्याएं रखी जाएंगी और स्कूल शिक्षा विभाग की लापरवाही से अवगत कराया जाएगा। इसके लिए जिला स्तर पर रणनीति तैयार कर ली गई है। सचिव स्तरीय वार्ता विफल, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
23 अप्रैल को हुई सचिव स्तरीय वार्ता बेनतीजा रही। संगठन ने स्पष्ट किया कि मांगें पूरी नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा और जरूरत पड़ने पर इसे और तेज किया जाएगा। प्रतिपूर्ति राशि तय करने की मांग, 2011 से नहीं हुआ पुनर्निर्धारण
एसोसिएशन ने शासकीय स्कूलों में प्रति विद्यार्थी खर्च सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि निजी स्कूलों को मिलने वाली प्रतिपूर्ति राशि तय हो सके। संगठन का कहना है कि 2011 से अब तक राशि का पुनर्निर्धारण नहीं हुआ है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
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