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राज्य सरकार ने इस बार धान बेचने वाले किसानों के लिए नया सिस्टम तैयार किया है। एग्रीस्टैक और किसान पोर्टल में रजिस्ट्रेशन करवाए बगैर किसान धान नहीं बेच पाएंगे। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा बनाया गया एग्रीस्टैक पोर्टल ही किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। इ
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प्रदेश के लगभग सभी जिलों में इस तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। दरअसल, राज्य शासन की ओर से कहा गया कि नया सिस्टम कई प्रकार की खामियों को दूर करेगा। इसमें रजिस्ट्रेशन कराने के बाद किसानों की पहचान और जमीन का ब्यौरा अब डिजिटल डेटाबेस से जुड़ जाएगा। इससे फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी और खरीदी व भुगतान की रियल टाइम मॉनिटरिंग भी संभव हो सकेगी।
पुराने खाताधारकों का दिख रहा नाम: पोर्टल की सबसे बड़ी खामी इसका पुराना डेटा है। पोर्टल में 2023 के बाद का डेटा अपलोड नहीं है। कृषि भूमि, वारिसान, मुखिया की मृत्यु के बाद फौती उठाने के बाद भी पोर्टल में पुराने नाम ही दर्ज हैं। पोर्टल में पुराना डेटा होने के कारण नए खाताधारकों का पंजीयन रिजेक्ट हो जा रहा है।
केंद्र और राज्य की योजनाओं का लाभ भी इसी पोर्टल से
यह पोर्टल सिर्फ धान बेचने के लिए ही नहीं बल्कि केंद्र और राज्य सरकार की अन्य योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी जरूरी है। इसमें पंजीयन के बाद किसानों से जुड़ी सभी योजनाओं जैसे पीएम किसान निधि, फसल बीमा, खाद बीज, सब्सिडी सीधे किसानों के खाते में आएगी। वहीं, कृषक उन्नति योजना का लाभ भी इससे ही मिलेगा। एक बार किसान का डिजिटल रजिस्ट्रेशन आईडी बन जाने के बाद बार-बार दस्तावेज देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
27.68 लाख किसानों ने कराया था पंजीयन खरीफ सीजन 2024-25 में 27.68 लाख किसानों ने धान बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया था, इनमें 1.42 लाख नए किसान पंजीकृत हुए थे, जो 2023-24 की तुलना में 25.49 लाख किसानों की तुलना में अधिक है।
एग्रीस्टैक से किसानों को मिलेगी डिजिटल पहचान एग्रीस्टैक एक डिजिटल इकोसिस्टम है। इसका उद्देश्य किसानों की सभी प्रकार की जानकारी जैसे पहचान, भूमि रिकॉर्ड, आय, कर्ज, फसल की जानकारी और बीमा इतिहास को डिजिटल प्लेटफार्म पर इकट्ठा करना है। हर किसान को एक विशिष्ट डिजिटल पहचान यानी किसान आईडी मिलेगी।
खरोरा-धमतरी जैसे कई स्थानों पर आ रही है परेशानी इस पोर्टल में खरोरा का नाम ही नहीं है जबकि आसपास के सभी गांवों का नाम दर्ज है। धमतरी में कई खाताधारकों का नाम ही नहीं दिख रहा है। बलौदाबाजार और महासमुंद में पंजीयन करवाकर घर पहुंचने से पहले ही किसान के पास रजिस्ट्रेशन कैंसिल होने का मैसेज आ रहा है।
काफी समय है, तब तक सुधार कर लिया जाएगा
कुछ जगहों पर शिकायतें आ रही थीं। इस संबंध में सभी संबंधित विभागों के अफसरों को अवगत कराया जाएगा। पंजीयन 30 अक्टूबर तक होना है, तब तक सुधार हो जाएगा। रीना बाबा साहेब कंगाले, सचिव, खाद्य विभाग
पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन में इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं:
- खसरा में गलत जानकारी: खसरा नंबर डालने पर किसान के बजाय पिता या दूसरे व्यक्ति का नाम दिखाई देता है।
- आधार से मोबाइल लिंक नहीं: आधार से मोबाइल नंबर का लिंक जरूरी है। सत्यापन के लिए इसी पर ओटीपी आएगा।
- गलत वेब लिंक या पोर्टल का उपयोग: गलत या पुराने वेब पते पर जाकर पंजीयन करने से भी समस्या आ रही है।
- आधार में गलत जानकारी: आधार कार्ड में दर्ज किसान का नाम, पिता या पति का नाम खतौनी से मेल नहीं खाता है।
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