साय सरकार की योजना: राम वनगमन पथ के 31 स्थलों पर तीन चरणों में बनेंगे आश्रय स्थल और सीता रसोई
छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनगमन पथ को लेकर भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। राज्य में राम वनगमन पथ के विकास को लेकर साय सरकार ने शोध के आधार पर 31 स्थलों को तीन चरणों में विकसित करने की योजना बनाई है। इस योजना के तहत राम वनगमन पथ का विकास तीन चरणों में 2029 तक पूरा किया जाएगा।
सरकार की इस योजना के अनुसार छत्तीसगढ़ में 31 आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई बनाई जाएंगी। यह विकास कार्य शोध के आधार पर चिह्नित किए गए स्थलों पर तीन चरणों में संपन्न होगा, जिसकी समयसीमा 2029 निर्धारित की गई है।
इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा प्रस्तावित चंद्रखुरी मंदिर को इस सूची में शामिल न करने पर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा है।
विपक्ष का कहना है कि चंद्रखुरी मंदिर को सूची से बाहर रखना आस्था के मामले में चुनावी सियासत है। विपक्ष ने इसे आस्था की जगह चुनावी सियासत करार दिया है।
साय सरकार ने अपनी ओर से इस योजना को शोध के आधार पर तैयार बताया है, जिसमें 31 स्थलों को तीन चरणों में विकसित करने की रूपरेखा तय की गई है। इन स्थलों पर आश्रय स्थल, सत्संग भवन और सीता रसोई जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
राम वनगमन पथ के विकास का पूरा कार्यक्रम 2029 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इस बीच चंद्रखुरी मंदिर को सूची में शामिल न किए जाने को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।




