शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ती छात्र आत्महत्याओं को रोकने सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के आधार पर स्कूल शिक्षा विभाग ने नई गाइडलाइन तैयार की है। इसे सभी जिलों के कलेक्टरों को भेजते हुए निर्देश दिया गया है कि प्रदेशभर के सरकारी व निजी स्कूल, प्रशिक्षण केंद्
.
प्रदेश सरकार ने स्वीकार किया है कि कोविड-19 के दौरान छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ा है, जिससे आत्महत्या के मामलों में वृद्धि हुई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने संस्थानों में मनोवैज्ञानिक सहायता और सुरक्षा उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।
गाइडलाइन के अनुसार, 100 या उससे अधिक छात्रों वाले सभी संस्थानों को प्रमाणित परामर्शदाता, मनोवैज्ञानिक या सामाजिक कार्यकर्ता की नियुक्ति करनी होगी। वहीं, छोटे संस्थान बाहरी परामर्शदाताओं से रेफरल व्यवस्था बनाएंगे। हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्तर पर इग्नू से गाइडेंस एंड काउंसलिंग डिप्लोमा प्राप्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जा सकेंगी।
निजी स्कूलों को भी जरूरत पड़ने पर काउंसलरों की सेवाएं लेना अनिवार्य होगा। संस्थानों में लगे पंखों में सुरक्षा उपकरण लगाना, छत और बालकनी तक छात्रों की पहुंच सीमित करना और छात्रावासों को उत्पीड़न से मुक्त रखना आवश्यक किया गया है।
अब मेधावी छात्रों का अलग बैच नहीं बनेगा शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में छात्रों की क्षमता या प्रदर्शन के आधार पर अलग बैच नहीं बनाए जाएंगे। शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने इस संबंध में सभी जिलों के कलेक्टरों को पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। छात्रावासों, कक्षाओं, सार्वजनिक स्थलों और अपनी वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर 8448440632 स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना जरूरी होगा। माता-पिता और अभिभावकों के लिए नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना होगा।
जिला स्तरीय निगरानी समिति का गठन भी होगा आत्महत्या रोकथाम उपायों के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय निगरानी समिति गठित की जाएगी। इसमें शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, आदिवासी विकास, समाज कल्याण, पुलिस, स्वास्थ्य, बाल संरक्षण विभागों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कलेक्टर द्वारा नामित दो सिविल सोसायटी सदस्य और दो शिक्षाविद शामिल होंगे। छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित गतिविधियों, रेफरल, प्रशिक्षण और हस्तक्षेपों का गोपनीय रिकॉर्ड रखकर वार्षिक रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

भास्कर एक्सपर्ट – प्रो. संदीप शुक्ला, मनोवैज्ञानिक
गलत कदम न उठाएं, मां-पिता को आपसे काफी उम्मीदें
बहुत से माता-पिता हैं, जिन्हें अपने समय में अवसर और सुख-सुविधाएं नहीं मिल पाईं। उनके अधूरे सपनों के कारण वे अपने बच्चों को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराने की कोशिश करते हैं ताकि बच्चे समाज में सम्मान पा सकें। उन्हें अपने बच्चों से काफी उम्मीदें रहती हैं। इसलिए, बच्चों को चाहिए कि लगन और मेहनत के साथ अपने कॅरियर पर ध्यान दें और कभी गलत कदम न उठाएं।
<
