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Home » Bilaspur DNA Forensic Workshop Launched By IG Garg
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Bilaspur DNA Forensic Workshop Launched By IG Garg

By adminMay 6, 2026No Comments4 Mins Read
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बिलासपुर5 घंटे पहले

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बिलासपुर में पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग के निर्देश पर डीएनए एवं जैविक/भौतिक साक्ष्य संकलन परीक्षण पर एक ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। मंगलवार को हुई इस कार्यशाला में रेंज के 200 से अधिक पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इसमें बताया गया कि सही सैंपलिंग ही दोषी को सजा और निर्दोष को आरोपमुक्त करने का आधार है।

यह कार्यशाला पुलिस महानिरीक्षक मीटिंग हॉल में आयोजित की गई। इसमें मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल और बिलासपुर रेंज आईजी कार्यालय के उप पुलिस अधीक्षक विवेक शर्मा भी उपस्थित थे।

वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. प्रियंका लकड़ा और डॉ. स्वाति कुजूर ने पुलिस अधिकारियों को सैंपल लेने के तरीके की जानकारी दी और प्रशिक्षण दिया। उन्होंने बताया कि अपराध या मृत्यु के मामलों की जांच में डीएनए और अन्य जैविक/भौतिक साक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनकी मदद से जांच को सही दिशा मिलती है।

कार्यशाला में बताया गया कि हत्या, हत्या के प्रयास और बलात्कार जैसे मामलों में अगर सैंपल लेते समय कोई गलती हो जाए, तो जांच रिपोर्ट सही तरीके से काम नहीं करती। इसका फायदा आरोपियों को मिल सकता है और वे बच भी सकते हैं।

साथ ही यह भी बताया गया कि निर्भया और तंदूर कांड जैसे मामलों में डीएनए टेस्ट ने आरोपियों को सजा दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।

क्षेत्रीय विज्ञान प्रयोगशाला की वैज्ञानिक अधिकारियों डॉ. प्रियंका लकड़ा और डॉ. स्वाति कुजूर ने स्पष्ट किया कि न्यायालयिक डीएनए न केवल दोषियों को सजा दिलाने में सहायक है, बल्कि निर्दोष व्यक्तियों को झूठे आरोपों से मुक्त करने का भी एक शक्तिशाली माध्यम है। इसे आधुनिक न्याय प्रणाली का ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ माना जाता है।

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व्यक्ति की पहचान का अहम सबूत

डा. प्रियंका लकड़ा ने बताया कि न्यायालयिक डीएनए (Forensic DNA) को न्याय का ब्लूप्रिंट कहा जाता है क्योंकि यह एक निर्णायक वैज्ञानिक उपकरण के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि यद्यपि मानव डी.एन.ए. का 99.9 प्रतिशत हिस्सा सभी में समान होता है, लेकिन न्यायालयिक विज्ञान शेष 0.1 प्रतिशत भिन्नता का उपयोग व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने के लिए करता है।

जानिए साक्ष्य के विविध स्रोत

जैविक साक्ष्य के रूप में रक्त, लार, वीर्य, बाल की जड़ें, हड्डियाँ, दाँत और टच डी.एन.ए. (त्वचा कोशिकाएं) का विश्लेषण किया जाता है। इसका प्राथमिक उपयोग अपराधियों की पहचान करने, पितृत्व (Paternity ) विवादों को हल करने और आपदाओं में अज्ञात शवों की पहचान करने के लिए होता है।

निर्भया और तंदूरकांड में डीएनए बना सजा का आधार

कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने पुलिस अफसरों को बताया कि निर्भया केस, तंदूर मर्डर केस और श्रद्धा वाकर केस जैसे प्रसिद्ध मामलों में डी.एन.ए. साक्ष्य सजा दिलाने में आधार बने।

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लार से पता चलता है कि वह मनुष्य का है या..

न्यायालयिक जीव विज्ञान (Forensic Biology) पर डॉ स्वाति कुजूर वैज्ञानिक अधिकारी ने बताया कि न्यायालयिक जीव विज्ञान वह शाखा है, जहां अपराध स्थलों से प्राप्त जैविक नमूनों का वैज्ञानिक विश्लेषण कर कानूनी जांच में सहायता प्रदान की जाती है।

उन्होंने बताया कि प्रारंभिक परीक्षण प्रयोगशाला में सबसे पहले नमूनों का प्रारंभिक (Presumptive) परीक्षण किया जाता है, ताकि यह पुष्टि हो सके कि पदार्थ जैविक (जैसे- रक्त या लार) है या नहीं। इसी आधार पर वैज्ञानिक यह निर्धारित करते हैं कि प्राप्त जैविक नमूना मानव का है या किसी जानवर का।

मौत के समय का पता लगाने में मददगार

उन्होंने बताया कि जीव विज्ञान शाखा में मानव विज्ञान (Anthropology), वनस्पति विज्ञान (Botany) और कीट विज्ञान (Entomology) जैसे विषय शामिल होते हैं। ये विषय यह पता लगाने में मदद करते हैं कि किसी व्यक्ति की मृत्यु कब और कैसे हुई।

उन्होंने यह भी कहा कि अपराध स्थल से सही तरीके से साक्ष्य इकट्ठा करना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि यही न्याय की प्रक्रिया का सबसे पहला और महत्वपूर्ण कदम होता है।

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सैंपलिंग में लापरवाही से साक्ष्य नष्ट होंगे

वैज्ञानिक अधिकारियों ने बताया कि डीएनए साक्ष्य बहुत संवेदनशील होते हैं। अगर सैंपल लेते समय सावधानी नहीं रखी जाए तो नमी, ज्यादा गर्मी और बैक्टीरिया उन्हें खराब कर सकते हैं। इसलिए सबूतों को प्लास्टिक की जगह कागज के बैग में रखना और सूखा रखना जरूरी होता है।

सबूत इकट्ठा करते समय “चेन ऑफ कस्टडी” का पालन करना भी कानून के हिसाब से जरूरी है।

इस प्रशिक्षण के सफल आयोजन पर आईजी रामगोपाल गर्ग ने डॉ. प्रियंका लकड़ा और डॉ. स्वाति कुजूर को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भोजराम पटेल ने किया।



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