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सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी), नई दिल्ली द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शिक्षा में पुतलीकला की भूमिका पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से नवाचारी शिक्षक टिकेश्वर महिलांगे ने जिले का प्रतिनिधित्व किया। देशभर से 68 शिक्षकों, कलाकारों और शिक्षा विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यशाला में वार्ली आर्ट, मॅडला आर्ट और कागज़ क्राफ्ट कठपुतली निर्माण व संचालन तकनीक पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। टिकेश्वर महिलांगे ने मुख्य संचालनकर्ता की भूमिका निभाते हुए सहयोगी शिक्षकों के साथ छत्तीसगढ़ राज्य की भौगोलिक स्थिति, राजनीतिक एवं प्रशासनिक ढांचा, खानपान, रहन-सहन, भाषा और कला-संस्कृति का पीपीटी और नृत्य के माध्यम से प्रभावशाली प्रस्तुतीकरण किया।
छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद भी सभी प्रतिभागियों और सीसीआरटी के प्रशिक्षकों को कराया गया। यह प्रस्तुति इतनी शानदार रही कि 11 राज्यों से आए शिक्षकों का मन मोह लिया। छत्तीसगढ़ से कुल 10 प्रतिभागी इस कार्यशाला में उपस्थित रहे, जिनमें टिकेश्वर महिलांगे, हेमंत श्रीवास और अंशुमन दुबे प्रमुख थे।
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