दुर्ग जिले की कांग्रेस नेत्री गुरमीत धनई (पूर्व कांग्रेस कमेटी की सदस्य) के आवास परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरा और करीब 10 एलईडी लाइट चोरी हो गई। इस वारदात को पुलिसकर्मियों के नाबालिग बेटों ने दी है। जिसका फुटेज भी सामने आया है। मामला सुपेला थाना क्षेत
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जानकारी के मुताबिक, इस मामले में 23 सितंबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। कांग्रेस नेत्री ने बताया कि उनके घर पर लगा सीसीटीवी कैमरा और करीब 10 एलईडी लाइट चोरी हुई है। साथ ही घर के अंदर पत्थर भी फेंके गए। फिलहाल, इस मामले की सुपेला पुलिस जांच कर रही है।
घरों के अंदर रोज फेंकते थे पत्थर, 4 दिन में ही चुराए 10 लाइट
गुरमीत धनई ने एफआईआर में बताया है कि घर के आंगन में बड़े-बड़े पत्थर पड़े हुए थे। पिछले चार दिनों से रोजाना यह घटना हो रही थी। पत्थर फेंकने से टाइल्स और गमला टूटा गया है। घर के सामने लगा कैमरा और 10 लाइट भी गायब मिला।
जब मैंने अपना सीसीटीवी फुटेज चेक किया। इसमें तीन अज्ञात लड़के पिछले तीन-चार दिन से घर के आंगन में पत्थर फेंककर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरा और 10 नग लाइट चोरी करते दिखे। जिसकी कीमत 10,000 रुपए है।
पुलिसवालों के बच्चे निकले आरोपी
जांच में सामने आया कि चोरी करने वाले बच्चे नाबालिग हैं और उनकी उम्र महज 12-12 साल है। ये बच्चे पुलिसकर्मियों के ही बेटे हैं। आरोपी बच्चों के पिता दुर्ग में एसएएफ बटालियन में तैनात जवान हैं। मामला सामने आने के बाद बच्चों के परिजन भी थाने पहुंचे और एफआईआर दर्ज न कराने का दबाव बनाने की कोशिश की।
कांग्रेस नेत्री ने कहा कि यह घटना पुलिस विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। क्योंकि जिस विभाग पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी है, उसी विभाग के बच्चों के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने से आम लोगों का भरोसा डगमगा सकता है।

कांग्रेस नेत्री ने भास्कर से बातचीत करते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज न करने के लिए दबाव बनाया गया।
सीसीटीवी ने खोला राज, एसपी के आदेश के बाद कार्रवाई
गुरमीत धनई के घर पर लगे सीसीटीवी कैमरे को ही बच्चे चुरा रहे थे। लेकिन सामने लगे दूसरे कैमरे में उनकी पूरी हरकत कैद हो गई। यही फुटेज पुलिस के हाथ लगी। मामले की जानकारी मिलते ही एसपी ने तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आधे घंटे के भीतर बच्चों को पकड़ लिया।
पुलिस जवानों पर लगे दबाव बनाने के आरोप
गुरमीत धनई ने आरोप लगाया कि जब मामला थाने पहुंचा तो पुलिसकर्मियों के परिवारजनों ने एफआईआर दर्ज न करने के लिए दबाव बनाया। यहां तक कि थाने में मौजूद पुलिस टीम भी बच्चों को बचाने का प्रयास कर रही थी। हालांकि, एसपी के सख्त निर्देश के बाद मामला दर्ज किया गया।
उन्होंने कहा कि पुलिस को जनता का मित्र कहा जाता है, लेकिन यहां तो पूरा अमला दबाव बनाने में जुटा था। अगर पुलिसवालों के बच्चे ही ऐसा करेंगे तो बाकी बच्चों पर क्या असर पड़ेगा? सुरक्षा कौन देगा?
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