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भास्कर एक्सपर्ट– डॉ. अब्बास नकवी, एमडी मेडिसिन,डॉ. राकेश गुप्ता, सदस्य मेडि .काउंसिल डॉ. महेश सिन्हा, पूर्व अध्यक्ष स्टेट IMA
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बच्चे को कौनसा इंजेक्शन दिया गया, ये अभी स्पष्ट नहीं है। लेकिन फिर भी ऐसी आशंका हो सकती है कि बच्चे की मौत दवा के ओवरडोज की वजह से हुई हो। ये एंटीबायोटिक के ओवरडोज होने वजह से भी हो सकता है। दरअसल, किसी भी बच्चे को एंटीबायोटिक या कोई भी दवा का जो डोज दिया जाता है।
उसमें उसके वजन, उसकी उम्र मेडिकल हिस्ट्री आदि पहलुओं पर अच्छी तरह से विचार करने के बाद ही डोज तय किया जाता है। इस केस में जैसा मेडिकल स्टोर संचालक ने इंजेक्शन लगाया है। इस संचाक के पास इंजेक्शन लगाने की न तो नैतिक रूप से और न ही कानूनन पात्रता है। उसका ऐसा करना एथिकली भी सही नहीं है। बच्चे को क्या दवा देनी है, कितनी मात्रा में देनी है।
उसे इस बारे में कुछ भी मालूम ही नहीं होगा। बच्चे को इंजेक्शन लगाने के बाद रिएक्शन भी हुआ है। कई बार एंटीबायोटिक दवाओं की मात्रा अधिक होने से ऐसी स्थिति बन सकती है।
वैसे झोलाछाप डॉक्टर्स का तो समूचे देश में जाल फैला हुआ है, वह सिर्फ इसलिए, क्योंकि इन्हें सिस्टम का प्रोटेक्शन मिला हुआ है। अगर कानून सख्त हो तो कोई भी इस तरह अवैध प्रेक्टिस नहीं कर सकेगा। इसे गंभीर अपराध कि श्रेणी में रखना चाहिए। गैर इरादतन हत्या की धारा लगानी चाहिए। उसने एक बच्चे को जानबूझकर डिग्री न होने के बावजूद इंजेक्शन लगाया। वैसे, प्रदेश में इस तरह के मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ये बेहद चिंतनीय और गंभीर है। ये आपराधिक मामला है, जिसमें सख्त सजा हो।
झोलाछाप के इलाज से जा रहीं जान
छत्तीसगढ़ में झोलाछाप डॉक्टरों ने खासकर दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में एक तरह से मकड़जाल फैला लिया है। ने तो इनकी निगरानी होती है, और न ही इन पर लगाम लगाने के लिए कोई अभियान चलाया जाता है। यही वजह है कि आए दिन लोग इनसे इलाज कराकर न केवल परेशान हो रहे, बल्कि कई तो अपनी जान भी गंवा रहे हैं।
5 दिन पहले ही बालोद जिले के अर्जुंदा गांव में पाइल्स से परेशान सुभाष ने झोलाछाप डॉक्टर से प्राइवेट पार्ट में इंजेक्शन लगवा लिया था। इस लापरवाही से उसकी मौत हो गई थी। अगस्त के आखिर में गरियाबंद जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से एक ग्रामीण की मौत हो गई थी।
इसी तरह सरगुजा में बनारस के युवक का बिना किसी मेडिकल डिग्री के क्लिनिक चलाने का मामला सामने आया है। इसके ढेरों केस पूरे प्रदेश में हैं। अब मौका है कि बच्चे की जान जाने के बाद प्रशासन और सरकार अभियान चलाकर अवैध प्रैक्टिशनर्स को रोके। वर्ना लोग यूं ही अपनों को खोते रहेंगे।
इस तरह का मामला पहली बार देखा
बलरामपुर के सीएमएचओ डॉ. बसंत सिंह ने कहा कि बलरामपुर में मैं लंबे अर्से से पदस्थ हू। मेरे पूरे करिअर में इस तरह का मामला पहली बार सामने आया है। मेडिकल स्टोर के संचालक ने आखिर बच्चे को इंजेक्शन क्यों लगाया? जैसे ही घटना की जानकारी मिली, सबसे पहले मेडिकल स्टोर को सील करवा दिया। वहां क्लिनिक जैसा सेटअप भी नहीं था, जिससे पता चले कि संचालक मेडिकल प्रेक्टिस करता था।
संचालक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है। संभवत ये परिवार मेडिकल स्टोर के आसपास ही रहता है। शायद यही वजह होगी कि परिचित होने के कारण परिजन ने बगैर किसी शंका के इंजेक्शन लगवा लिया। बच्चे को बुधवार को शाम 7-8 बजे के आसपास बच्चे को इंजेक्शन लगाया गया। रिएक्शन के कारण बच्चे की हालत गिरती गई।
मेडिकल स्टोर संचालक ने लगाया इंजेक्शन, सात साल के बच्चे की मौत, स्टोर सील-एफआईआर भी
बलरामपुर में अजीब घटना सामने आई है। 7 साल के मासूम को उसके पिता पैर में लगे घाव का इलाज कराने के लिए बलरामपुर के वार्ड क्रमांक 8 स्थित शंभू मेडिकल स्टोर लेकर गए थे।
मेडिकल स्टोर संचालक शंभू विश्वकर्मा ने बच्चे के पिता की सहमति से बिना डॉक्टर की सलाह के खुद ही बच्चे अनमोल एक्का को इंजेक्शन लगा दिया। इसके तुरंत बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। बेहोशी की हालत में अनमोल को पहले जिला अस्पताल और फिर अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, लेकिन तड़के 3 बजे उसकी मौत हो गई। बच्चे की मां सुशीला ने पुलिस में शिकायत की है।
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