![]()
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर में आयोजित जनजातीय गौरव दिवस कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस मौके पर सीएम साय ने कहा कि पिछले साल भी इसी सभागार में जनजातीय गौरव दिवस की कार्यशाला सफलतापूर्वक आयोजित हुई थी।
.
सीएम ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने का निर्णय लेकर जनजातीय नायकों की गौरवशाली विरासत को सम्मानित किया है। प्रधानमंत्री धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना में छत्तीसगढ़ में तीव्र गति से विकास कार्य हो रहे हैं।
जनमन योजना के अंतर्गत प्रदेश में 2,500 किलोमीटर सड़कों का निर्माण और 32,000 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने शिक्षाविदों और प्रबुद्धजनों से आग्रह किया कि जनजातीय गौरव और इतिहास को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाए, ताकि नई पीढ़ी अपने पूर्वजों की समृद्ध विरासत से प्रेरणा ले सके।
कार्यक्रम में रामविचार नेताम, केदार कश्यप, टंकराम वर्मा और अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के महामंत्री योगेश बापट भी शामिल हुए।
नवा रायपुर में तैयार हो रहा शहीद वीरनारायण सिंह ट्रायबल म्यूजियम
छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की योगदान की थीम पर नवा रायपुर में शहीद वीरनारायण सिंह संग्रहालय का निर्माण किया जा रहा है। इस संग्रहालय में 15 गैलरी तैयार किए जा रहे हैं। यहां ब्रिटिश हुकूमत में हुए जनजाति विद्रोहों की झांकी तैयार की जा रही है। संग्रहालय पुरखौती मुक्तांगन के पास लगभग 10 एकड़ में तैयार किया जा रहा है।
पीएम नरेंद्र मोदी 1 नवंबर को इसका लोकार्पण करेंगे। यह न केवल छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के स्वतंत्रता काल में दिए गए बलिदान को याद दिलाएगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली आदिवासी परंपरा से भी लोगों को रूबरू करवाएगा।
15 गैलरी में जनजाति विद्रोह की झांकी इसमें 15 गैलरी तैयार की जा रही है। पहली गैलरी में छत्तीसगढ़ की जनजातीय जीवन शैली को दर्शाया जाएगा, दूसरी में राज्य की जनजातियों पर अंग्रेजों और स्थानीय हुकूमत के अत्याचार, तीसरी में हल्बा विद्रोह, चौथी में सरगुजा विद्रोह और पांचवी गैलरी में भोपालपट्टनम विद्रोह को दिखाया गया है।
इसी तरह छठवीं गैलरी में परलकोट विद्रोह, सातवीं में तारापुर विद्रोह, आठवीं में लिंगागिरी विद्रोह प्रदर्शित किया गया है। जबकि नौंवी में कोई विद्रोह, दसवीं में दंतेवाड़ा का मेरिया विद्रोह, ग्यारवीं में मुरिया विद्रोह, बारहवीं में रानी चौरिस विद्रोह, तेरहवीं में बस्तर के भूमकाल विद्रोह, चौदहवीं में शहीद वीर नारायण सिंह के सोनाखान विद्रोह एवं पंद्रहवीं गैलरी में झण्डा सत्याग्रह का चित्रण किया जा रहा है।
<
