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नगर और आसपास के ग्रामीण अंचलों में कार्तिक शुक्ल द्वितीया के दिन भाई-बहन का पवित्र पर्व भाईदूज हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। गुरुवार को इस शुभ अवसर पर बहनों ने अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना की। परंपरा के अनुसार, भाइयों ने अपनी बहनों से आशीर्वाद लिया और उन्हें उपहार भेंट किए।
बहनों ने भाइयों का मुंह मीठा कराया और पारंपरिक व्यंजनों के साथ एक साथ भोजन किया। इस दिन बहन के घर भोजन करने की परंपरा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि बहन के हाथों बना भोजन ग्रहण करने से भाइयों को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता और उनका जीवन खुशहाल होता है। पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। यमुना ने उनका स्वागत कर उन्हें भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने यह वरदान दिया कि इस दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर भोजन करेगा और उनका आशीर्वाद लेगा, वह दीर्घायु होगा। इस पवित्र पर्व ने भाई-बहन के प्रेम और स्नेह के बंधन को और मजबूत किया। पूरे क्षेत्र में भाईदूज का पर्व हर घर में खुशी और उल्लास लेकर आया।
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