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Home » Of the 167 corneas found at Bilaspur’s SIMS, only 50 were transplanted, leaving 111 wasted. These could have provided vision to the same number of blind people. | बिलासपुर सिम्स में मिले 167 कॉर्निया में से 50 ही प्रत्यारोपित 111 बर्बाद, इतने ही दृष्टिहीनों को इनसे मिल सकती थी रोशनी – Raipur News
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Of the 167 corneas found at Bilaspur’s SIMS, only 50 were transplanted, leaving 111 wasted. These could have provided vision to the same number of blind people. | बिलासपुर सिम्स में मिले 167 कॉर्निया में से 50 ही प्रत्यारोपित 111 बर्बाद, इतने ही दृष्टिहीनों को इनसे मिल सकती थी रोशनी – Raipur News

By adminOctober 9, 2025No Comments5 Mins Read
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प्रदेश में ब्लॉक और जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग के लचर कामकाज और प्रशिक्षित स्टाफ के नहीं होने से अंधत्व निवारण, नेत्रदान जैसे जागरूकता अभियान रंग नहीं ला पा रहे हैं।

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बिलासपुर मेडिकल कॉलेज में नेत्रदान और कार्निया प्रत्यारोपण के आंकड़े देखें तो बड़ी लापरवाही सामने आती है। देश में 1976 से नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ ब्लाइंडनेस एंड विजुअल इम्पेयरमेंट चल रहा है। रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग में से सिर्फ मेकाहारा के आंकड़े ही संतोषजनक हैं।

कार्निया यूटिलाइजेशन यानी नेत्रदान में मिली कॉर्निया के प्रत्यारोपण का औसत 40 से 50 फीसदी रहा है, लेकिन प्रदेश में सिम्स बिलासपुर में पांच साल का औसत 30.49 है। राजधानी रायपुर के मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्थिति बेहतर है।

यहां कार्निया यूटिलाइजेशन औसत 67.7 प्रतिशत है। बाकी नेत्र बैंक और कार्निया प्रत्यारोपण केंद्र इसकी जानकारी देने तक से डरते हैं। प्रदेश में वर्तमान में 6 नेत्र बैंक और 4 कॉर्निया प्रत्यारोपण केंद्र हैं लेकिन जिलों और इन केंद्रों के बीच समन्वय नहीं होने से दान में मिले कॉर्निया बेकार हो रहे हैं।

ऐसी अनदेखी ठीक नहीं… कहीं वर्षों से इंतजार, कई मरीजों के तो रिकॉर्ड तक गलत

  1. लूथरा बिलासपुर के मो. कासिम (2016-17 में रायगढ़ में जांचे गए) सरकारी कर्मचारी हैं, उन्होंने बताया कि जांच के बाद किसी ने संपर्क नहीं किया। हाल में सिम्स से अचानक फोन आया।
  2. सूची में शामिल रायगढ़ तमनार के वरुण सिदार के नंबर की जगह स्वास्थ्य कर्मी का मोबाइल नंबर दर्ज था। फोन उन्होंने ही उठाया, उन्होंने कहा- वरुण कहीं चले गए हैं, मिल नहीं रहे हैं।
  3. आदिवासी ब्लॉक की ललीमा राठिया की जांच छह साल पहले हुई। बिलासपुर सिम्स गईं, यहां डॉक्टर्स बोले- रायपुर जाओ। पर कभी प्रत्यारोपण की कोशिश नहीं हुई, शिविरों में दवा देकर छोड़ दिया।

सिम्स बिलासपुर… चार कॉर्निया संक्रमण से खराब

2021-22 से 2025-26 के बीच 167 कॉर्निया प्राप्त हुए, जिनमें से केवल 50 प्रत्यारोपित हुए। 4 कॉर्निया संक्रमण के कारण अनुपयोगी रहे, 2 अन्य केंद्र भेजे गए और शेष शोध में उपयोग किए गए।

रायपुर से सीखें… ग्राफ्टिंग राष्ट्रीय औसत से बेहतर

रायपुर में कॉर्निया प्रत्यारोपण 59% है। 2021-22 से 2025-26 तक मेकाहारा अस्पताल को 243 कॉर्निया मिले, जिनमें से 159 प्रत्यारोपित किए गए। 6 कॉर्निया खराब और 2 अन्य केंद्र भेजे, बाकी रिसर्च में खपे।

डेटा देने से कतराते रहे बड़े मेडिकल संस्थान

श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइसेंज भिलाई के प्रबंधन से बात की गई लेकिन यहां केरोटोप्लास्टी यानि कॉर्निया प्रत्यारोपण की जानकारी ही नहीं मिल सकी। पत्राचार भी किया गया लेकिन जवाब नहीं दिया गया।

जो बेकार हुए उन्हें रिसर्च पर इस्तेमाल बताया गया

सिम्स के नेत्र विभाग के टेक्निशियन, एक रिटायर्ड फैकल्टी से बात की तो उन्होंने बताया कि मरीजों को ग्रामीण इलाकों से यहां लाने पर कोई गंभीर नहीं है। जो कॉर्निया बेकार हो जाते हैं उन्हें रिसर्च में इस्तेमाल बताकर आंकड़ों में लीपापोती की जाती है।

एक्सपर्ट व्यू – स्टाफ प्रशिक्षित नहीं, मरीजों की सूची होना जरूरी: डॉ. चारूदत्त

गणेश विनायक नेत्र चिकित्सालय के डॉ. चारूदत्त कलमकार कहते हैं, मृतक से कॉर्निया 6 घंटे के भीतर लिया जा सकता है और इसे 7 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सरकार और मेडिकल कॉलेज के पास दाताओं की सूची रहती है, लेकिन रिसीवर की सूची न होने से कॉर्निया समय पर जरूरतमंद तक नहीं पहुँच पाता। कई बार बुजुर्ग दाताओं का कॉर्निया युवा मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं होता।

जिलों में प्रशिक्षित तकनीशियनों की कमी और कॉर्निया ट्रांसप्लांट सर्जनों की सीमित संख्या भी बड़ी बाधा हैं। कृषि प्रधान राज्य में धान काटते समय किसानों और मजदूरों की आँखों में चोटें आम हैं, लेकिन व्यवस्थित तंत्र न होने से वे लाभ नहीं उठा पाते। कई बार रिसीवर को संपर्क करने पर भी 24 घंटे में अस्पताल न पहुँच पाने से कॉर्निया व्यर्थ चला जाता है।

तैयार नहीं कर पाए वेटिंग लिस्ट

नोटो (नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन) ने राज्यों से कॉर्निया प्रत्यारोपण की वेटिंग लिस्ट मांगी थी। सोटो (राज्य ईकाई) जानकारी भेजने की बात कह रहा है लेकिन डाटाबेस तैयार नहीं हो पाया है। छत्तीसगढ़ में अधिकांश जिलों के पास न तो ताज़ा सूची है, न ही अद्यतन डाटा है। कहीं सूची खानापूर्ति के लिए बनाई गई, तो कहीं वर्षों से अपडेट नहीं हुई।

प्रयास पर बात नहीं, सफाई देते रहे जिम्मेदार

विभाग का सिस्टम ठीक काम कर रहा है, लेकिन जो कार्निया आते हैं उनमें कई सूटेबल यानि ट्रांसप्लांट के लायक नहीं होते हैं। जिन मरीजों की सूची भेजी जाती है उनमें कई लोग ऐसे होते हैं जिनमें कार्निया ट्रांसप्लांट की संभावना नहीं होती है। हमारे पास रेसिपिएंट ( कॉर्निया लेने वाले) की लिस्ट होती है। कुछ लोग फोन करके बुलाने पर नहीं पहुंच पाते हैं। – डॉ. सुचिता सिंह, एचओडी, नेत्ररोग विभाग सिम्स

हमारे पास कॉर्निया ब्लाइंडनेस के मरीजों (रेसिपिएंट) की सूची है। कॉर्निया ग्राफ्टिंग (ट्रांसप्लांट) लगातार हो रही है। नेत्रदान में मिले कॉर्निया का इस्तेमाल बेहतर है। जो कॉर्निया इस्तेमाल के लायक नहीं उनका रिसर्च में इस्तेमाल किया जाता है। अभी ग्राफ्टिंग रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग जैसे बड़ी जगहों पर हो रही है, यहां तक ग्रामीण मरीज समय पर पहुंचे इसे और बेहतर करने की जरूरत है, हम इस पर काम कर रहे हैं। -डॉ. निधि ग्वालरे, राज्य नोडल अधिकारी अंधत्व नियंत्रण कार्यक्रम



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