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बस्तर अंचल की हरी-भरी वादियों और गहरे जंगलों में सैकड़ों ऐसी दुर्लभ वनौषधियां और जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जो न केवल स्थानीय परंपराओं का आधार हैं, बल्कि देश-विदेश में भी इनकी बड़ी मांग है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इन बहुमूल्य जड़ी-बूटियों का अवैध दोहन और व्यापार तेजी से बढ़ रहा है।
बिचौलियों और बाहरी व्यापारियों द्वारा इन जड़ी-बूटियों को बेहद कम दामों पर खरीदकर ऊंचे दामों में बेचा जा रहा है, जिससे न केवल स्थानीय परंपरागत वैद्य विद्या को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि जंगलों का संतुलन भी बिगड़ रहा है। इसी गंभीर विषय को लेकर अब बस्तर संभाग भर के सिरहा, गुनिया, बैगा और पारम्परिक वैद्य पुजारी एक मंच पर आ रहे हैं। इन सभी पारंपरिक चिकित्सकों और प्रकृति-सेवी समुदायों ने मिलकर सिरहा गुनिया पारम्परिक वनौषधि वैद्य पुजारी संघ बस्तर संभाग का गठन किया है, जो इस मुद्दे पर बड़ा आंदोलन खड़ा करने की तैयारी में है।
संघ की ओर से सुकरू राम कोर्राम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 24 अक्टूबर को मर्दापाल स्थित वन महादेव मंदिर परिसर में ब्लॉक स्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों से पारंपरिक वैद्य और पुजारी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य बस्तर की दुर्लभ वनौषधियों को संरक्षित करने के लिए ठोस रणनीति बनाना, अवैध क्रय-विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपना और आने वाले समय में जनजागरण व जन आंदोलन की रूपरेखा तय करना है। इससे पहले भी कलेक्टर को इस समस्या से अवगत कराया गया था।
संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह सिर्फ जड़ी-बूटियों को बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और चिकित्सा विरासत को संरक्षित करने की लड़ाई है। बस्तर के जंगलों की हर वनस्पति हमारे पूर्वजों की धरोहर है, जिसे किसी भी कीमत पर खत्म नहीं होने दिया जाएगा। बैठक में यह भी तय किया जाएगा कि कैसे गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को इस दिशा में जोड़ा जाए, ताकि बस्तर की समृद्ध वन संपदा को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सके। संगठन ने सभी मूल निवासी सिरहा, गुनिया, बैगा और पारंपरिक वैद्य-पुजारियों से अधिक से अधिक संख्या में बैठक में उपस्थित होने का आह्वान किया है।
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