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पढ़ाई की अनुमति नहीं देने के खिलाफ याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई।
छत्तीसगढ़ में एक सरकारी कर्मचारी के करियर को लेकर हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। दरअसल रायपुर जिला कोर्ट में एजी-3 के पद पर कार्यरत अजीत चौबेलाल गोहर ने साल 2023-24 में एलएलबी की पढ़ाई की अनुमति मांगी। जिसे रायपुर कोर्ट ने इंकार कर दिया था।
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इसके बाद अजीत चौबेलाल हाईकोर्ट पहुंचा। हाईकोर्ट ने अपनी सुनवाई में कहा कि पढ़ाई रोकना कर्मचारी के करियर को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा। कोर्ट ने पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी है।
अब जानिए पूरा मामला
दरअसल, रायपुर जिला कोर्ट में एजी-3 के पद पर कार्यरत अजीत चौबेलाल गोहर ने साल 2023-24 में एलएलबी प्रथम वर्ष की पढ़ाई की अनुमति ली। इसके बाद वर्ष अनुमति लेकर 2024-25 में द्वितीय वर्ष की पढ़ाई पूरी की।
जिसके बाद उन्होंने तृतीय वर्ष में प्रवेश और पढ़ाई अनुमति के लिए अनुमति मांगी, जिस पर 4 सितंबर को रायपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय के प्रिंसिपल जज ने उन्हें अनुमति देने से इंकार कर दिया।
रजिस्ट्रार जनरल ने भी नहीं दी अनुमति
इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को अभ्यावेदन दिया। इसमें बताया कि वो दो साल की पढ़ाई पूरी कर चुका है। अब तीसरे साल की पढ़ाई के लिए अनुमति चाहिए।
लेकिन, उनके अभ्यावेदन को 31 अक्टूबर को रजिस्ट्रार जनरल ने अस्वीकार कर दिया। इन दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाई।
कक्षाओं और कोर्ट का समय अलग
याचिकाकर्ता ने देते हुए कहा कि उनकी कक्षाएं सुबह 7 से 10 बजे तक लगती हैं, जबकि कोर्ट का समय सुबह 10.30 बजे से शुरू होता है, इसलिए पढ़ाई से कोर्ट के काम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जरूरत पड़ने पर वे समयबद्ध तरीके से अपने सभी दायित्वों को पूरा करेंगे।
हाईकोर्ट ने कहा- दो वर्ष की अनुमति, तीसरे में रोकना अनुचित
हाईकोर्ट के जस्टिस एनके व्यास ने कहा कि याचिकाकर्ता को दो सालों की पढ़ाई की अनुमति पहले ही मिल चुकी है। ऐसे में अंतिम वर्ष से रोकना न केवल उनके भविष्य को प्रभावित करेगा, बल्कि यह भी उचित नहीं होगा कि पूर्व में दी गई अनुमति को अब अवैध माना जाए।
कोर्ट ने छत्तीसगढ़ जिला न्यायपालिका स्थापना (भर्ती एवं सेवा की शर्तें) कर्मचारी नियम 2023 के नियम 47 का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व नियमों के तहत दी गई अनुमति वैध हैं और उन्हें निरस्त करने का कोई कारण नहीं बनता। हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल का आदेश निरस्त कर दिया है।
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