रायपुर10 घंटे पहलेलेखक: प्रमोद साहू
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राज्य में साइबर क्राइम और फ्रॉड की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन पीडितों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। कारण यह है कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी पुलिस न तो एफआईआर दर्ज कर रही है और न ही प्रभावी कार्रवाई हो रही है। पुलिस खुद अपील करती है कि साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। पीड़ित भी थाने जाने से पहले ऑनलाइन शिकायत कर रहे हैं।
पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल रायपुर के 8600 साइबर फ्रॉड पीडितों ने पोर्टल पर ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज कराई। इन मामलों को तुरंत कार्रवाई के लिए संबंधित थानों में भेज दिया गया। पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की और पीडितों को बुलाकर बयान भी दर्ज किए, लेकिन इसके बाद अधिकांश मामले ठंडे बस्ते में चले गए।
लगातार चक्कर लगाने या सिफारिश के बाद केवल 190 पीडितों की शिकायतों पर ही एफआईआर दर्ज हुई। बाकी मामलों की जांच बंद कर दी गई। इन मामलों में न एफआईआर हुई, न आरोपियों को पकड़ने का प्रयास किया गया और न ही रकम की रिकवरी हो सकी।
भास्कर एक्सपर्ट – मुकेश चौधरी, साइबर क्राइम
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तीन साल में फ्रॉड में एक भी सजा नहीं तीन वर्षों में साइबर फ्रॉड के एक भी मामले में सजा नहीं हो सकी है। पुलिस एफआईआर वाले मामलों में ही कार्रवाई करती है, लेकिन मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंच पाती। बैंक खाते-सिम धारकों की गिरफ्तारी होती है, जबकि असली आरोपी बच जाते हैं। 10% मामलों में ठग पैसा लौटाकर समझौता कर लेते हैं।
साइबर ठगी का कहीं भी डेटाबेस नहीं राज्य में साइबर ठगी का कोई केंद्रीकृत डेटाबेस नहीं है। 33 जिलों में जालसाजी की धाराओं में केस दर्ज होते हैं और बाद में आईटी एक्ट जोड़ा जाता है। जांच इंस्पेक्टर स्तर पर होने से अलग डेटा तैयार नहीं हो पाता। थानों में शिकायतों का भी व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जाता।
आई4सी दिमाग, पर हाथ-पैर पुलिस देश में साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए आई4सी समन्वय केंद्र के रूप में काम कर रहा है। इसे सिस्टम का दिमाग माना जाता है, जबकि कार्रवाई की जिम्मेदारी पुलिस की है। लेकिन कई मामलों में पुलिस स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे ठगी के मामलों में प्रभावी नियंत्रण नहीं बन पा रहा है।
2 लाख मामलों में केस दर्ज नहीं कई शहरों में 2 लाख रुपए से कम ठगी पर एफआईआर दर्ज नहीं होती। मामलों की अधिकता और स्टाफ की कमी कारण है। पीड़ित रिकवरी के लिए भटक रहे हैं। आईटी एक्ट में संशोधन, जांच अधिकार बढ़ाने और हर थाने में प्रशिक्षित स्टाफ बढ़ाने की मांग उठी है।
हर मामले में FIR नहीं पोर्टल पर दर्ज होने वाली सभी शिकायतें ठगी से संबंधित नहीं होतीं। जिनमें वास्तव में ठगी होती है, उनमें पीड़ित को बुलाकर केस दर्ज किया जाता है। कई मामलों में पैसा होल्ड होने पर पीड़ित केस दर्ज कराने से मना कर देते हैं।– डॉ. संजीव शुक्ला, पुलिस कमिश्नर
साइबर फ्रॉड की स्थिति
- साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल में 365 दिनों में 8600 शिकायतें।
- पुलिस थानों इसमें से सिर्फ 190 मामलों में एफआईआर की गई।
- रायपुर में ही 40 करोड़ रुपए से ज्यादा की साइबर फ्रॉड हुआ है।
- इसमें से तकरीबन 7 करोड़ रुपए होल्ड कराया गया है।
- इसमें दूसरे राज्यों से 300 से ज्यादा आरोपी पकड़कर लाए गए।
- ठगी के अधिकांश केस में पैसा हवाला से विदेश भेजा जा रहा है।
- ठगों के 15000 फोन नंबर को ब्लॉक किराया, जिससे ठगी हुई है।
- ठगों के 3000 खातों को बंद कराया गया, जिसमें लेन-देन किया गया।

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