![]()
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जिला कांकेर के बारदेवरी मंडल के ग्राम पंचायत कोदागांव के बाजार चौक में हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुख्य वक्ता प्रांत संघचालक डॉ. टोपलाल वर्मा, आयुर्वेद के जानकार उपेश्वर ठाकुर, संत समाज से नागेंद्र कृष्णा कालीदास रहे। सम
.
आजादी के पूर्व यहां के ऋषि, मुनियों ने विदेशों को ज्ञान विज्ञान देने के साथ विदेशो में जीवन जीने की कला सिखाते रहे हैं। मुगलों ने नालंदा विश्वविद्यालयों में रखे धार्मिक ग्रंथों को जलाया था, जिसे जलाने में ही 6 महीने लग गए थे। इससे अनुमान लगाया जा सकता है वहां कितने प्रचुर मात्रा में धर्म ग्रंथ थे। पहले देश में 65 विश्वविद्यालय थे। भारत पहले सभी दृष्टिकोण से समृद्ध था। इस समृद्ध देश को मुगलों व अंग्रेजों ने लुटा। देश की आजादी में महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई, वीर शिवाजी जैसे वीर पुरुषों ने लड़ाई लडी। उनके त्याग तपस्या बलिदान से देश को आजादी मिली। आजादी के बाद से देश को राष्ट् विरोधियों का सामना करना पड़ रहा है। देश आज विकसित भारत की और आगे बढ़ रहा है और ऐसे विकसित भारत में हम सभी का क्या योगदान हो इसकी चिंता करने की जरूरत है।
हमें विदेशी ताकतों से देशों को सुरक्षित रखने की जरूरत है। साथ ही आंतरिक तौर पर सतर्क रहने की आवश्यकता है। बस्तर अंचल में हो रहे धर्मांतरण को लेकर चिंता जताते कहा इसाई समुदाय चर्च के आड़ में स्वास्थ्य सेवाएं देने का ढ़ोंग करते हिंदू परिवारों का धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। हमारा प्रयास रहना चाहिए हमें मतांतरण परिवारों को वापस हिंदू समाज में लाना होगा। हमें संगठित रहकर जाति भेद को मिटाते हुए आपस में सामाजिक समरसता बनानी है।
सनातन की जानकारी सबको होनी चाहिए: संत समाज के नागेंद्र कृष्ण कालीदास ने कहा कि आज हमें अपनों से डर लगने लगा है। आज देश में सभी को महान सनातन धर्म की जानकारी रखने की जरूरत है। हमें धर्म ग्रंथों का संरक्षण करना होगा। धर्मग्रंथ ही हमें सही दिशा दिखाते हैं। इन्ही धर्मग्रंथों के आधार व्यक्ति को अचना आचरण रखना चाहिए। स्वदेशी अपनाने की जरूरत पंच परिवर्तन के विषय पर आयुर्वेद के जानकार उपेश्वर ठाकुर ने कहा हमें स्वदेशी को अपनाने की जरूरत है। हमारे किसान, इंजीनियर अन्न से लेकर जरुरी चीजें आज पैदा कर रहे हैं। हमें हमारे देश में ही बनी चीजों का उपयोग करना चाहिए। सनातन संस्कृति के आधार गौ, गंगा, गायत्री रहे हैं। पहले हम सभी के घर में गाय पाली जाती थी जिसे दीपक दिखाकर प्रणाम किया जाता था। गौ का मूत्र अमृत के समान है। इसके सेवन से हमें किसी तरह की बीमारी नहीं होती। आज हवा, पानी, मिट्टी सभी विषाक्त हो गए हैं जिसे गौ मूत्र के सेवन से ठीक किया जा सकता है। गिलोय, परिजात, निर्गुंडी का काढ़ा सेवन करने से बीपी, शुगर दूर हो जाते हैं।
<
