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राजधानी के किसी भी ड्राइविंग स्कूल में आरटीओ के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। नए नियमों के तहत ड्राइविंग स्कूल खोलने के लिए 2 एकड़ जमीन होना चाहिए। कार चलाना सिखाने के लिए लोगों को पहले सिम्यूलेटर मशीन में बिठाना है। इसके बाद सड़क पर उतारना है। दै
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राजधानी में ड्राइविंग स्कूलों की करीब 10 साल से जांच नहीं हुई है। राजधानी में सिर्फ तीन ड्राइविंग स्कूल ऐसे हैं जिनके पास बैच नंबर वाले ड्राइवर समेत पूरा सेटअप है। इसमें दो मारुति सुजुकी कंपनी और एक निजी ड्राइविंग स्कूल है। परिवहन विभाग के नियमों के अनुसार लाइसेंस लेने से पहले कार चालक को कम से कम 21 घंटे वाहन चलाने का प्रशिक्षण जरूरी है। लेकिन ज्यादातर 10 से 15 दिन में 10 घंटे ही ट्रेनिंग दे रहे हैं और 4500 रुपए तक का शुल्क वसूल रहे हैं।
तीन दिन से कार चलाना सीख रहीं तीस वर्षीय रंजना ठाकुर ने बताया कि पहले दिन से ही वह पर कार चला रही है। इससे पहले सिर्फ इतना बताया गया कि ये क्लच, ब्रेक और एक्सीलेटर है। मार्केटिंग की नौकरी करने वाले संतोष यादव ने बताया कि कार चलाना सीख रहा हूं। कोई बेसिक कोई जानकारी नहीं दी गई है। कहा गया है कि 15 दिन में कार चलाना सिखा देंगे। संतोष श्रीवास ने बताया कि ड्राइविंग स्कूल में एडमिशन के समय ही तय कर दिया जाता है कि रोज कार चलवाएंगे।
कैपिटल ड्राइविंग स्कूल शक्ति नगर मेन रोड पर स्थित यह स्कूल एक छोटी सी दुकान में चल रहा है। स्कूल वालों ने दैनिक भास्कर संवाददाता को बताया कि वो 15 दिन में गाड़ी चलाना सिखा देंगे। स्कूल के पास ड्राइविंग मशीन तक नहीं है। न्यू राजधानी मोटर ड्राइविंग स्कूल खम्हारडीह थाने के पास स्थित यह ड्राइविंग स्कूल एक मकान में चल रहा है। स्कूल में किसी भी तरह की कोई सुविधा नहीं है। मशीन तक नहीं लगाई गई है। संचालक ने दावा किया 15 दिन में गाड़ी चलवा देंगे। इंडियन मोटर ड्राइविंग स्कूल चांदनी चौक से आगे नेहरू नगर में एक छोटे से कमरे में संचालित ड्राइविंग स्कूल में कोई सुविधा नहीं है। मशीन के बारे में पूछा तो कहा- सीधे सड़क पर सिखाएंगे। 15 दिन की ट्रेनिंग में रोज 10 किमी गाड़ी चलवाएंगे।
ये नियम मानना अनिवार्य, लेकिन कोई भी नहीं मान रहा
- ड्राइविंग स्कूल खोलने के लिए कम से कम 2 एकड़ जमीन होनी चाहिए।
- प्रशिक्षक के पास कम से कम पांच साल ड्राइविंग का अनुभव होना चाहिए।
- प्रशिक्षुओं को कार चलाने के साथ ही सभी तरह की तकनीकी जानकारी देना है।
- पंजीकृत स्कूलों में 21 घंटे का प्रशिक्षण जरूरी है। कोर्स 22 दिन का होना चाहिए।
- वाहन की आंतरिक व बाहरी बॉडी की तकनीकी जानकारी देने क्लास लगानी है।
- एक हफ्ते नहीं बल्कि 10 से 12 दिन ड्राइविंग का प्रैक्टिकल कराना चाहिए।
रायपुर के ड्राइविंग स्कूल, अधिकतर का बुरा हाल
आरंभ ड्राइविंग स्कूल {एबीसीडी पर्सनल ड्राइविंग क्लासेस {कैपिटल मोटर ट्रेनिंग एंड ड्राइविंग स्कूल {सिटी ड्राइविंग स्कूल {डॉली ट्रेनिंग स्कूल {नेशनल मोटर ट्रेनिंग एंड इंजीनियरिंग स्कूल {कोमल ड्राइविंग स्कूल {महालक्ष्मी ड्राइविंग स्कूल {न्यू राजधानी मोटर ड्राइविंग स्कूल {साईं कार ड्राइविंग स्कूल एंड ट्रेनिंग सेंटर {परफेक्ट ड्राइविंग स्कूल {प्रगति ड्राइविंग स्कूल {इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च छग {सालोम ड्राइविंग स्कूल {सारथी ड्राइविंग स्कूल {स्काय ऑटोमोबाइल्स मारुति सुजुकी ड्राइविंग स्कूल {विश्वभारती ऑटोमोबाइल्स प्रा. लि. {विद्या ड्राइविंग स्कूल {स्पीड ड्राइविंग स्कूल {रजा ड्राइविंग स्कूल।
सीधी बात – आशीष देवांगन, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी
राजधानी के ड्राइविंग स्कूलों में नियम पालन क्यों नहीं हो रहा? – शिकायत मिली है, सभी स्कूलों की जांच करवा रहे हैं। जरूरी कार्रवाई करेंगे। किसी भी स्कूल के पास 2 एकड़ जमीन नहीं है? – कई ऐसे हैं जिन्हें इस नियम के पहले लाइसेंस मिला है। एक हफ्ते में कार चलाना सिखाने का दावा कर रहे हैं? – ये गलत है, नियमानुसार कोर्स कराना है। 21 घंटे की ट्रेनिंग अनिवार्य है।
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