![]()
राज्योत्सव के मंच पर शनिवार को उस समय असहज स्थिति बन गई, जब रामनामी समाज के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उन्हें मोर मुकुट पहनाना चाहा। सुरक्षा प्रोटोकॉल के चलते समाज के लोगों को मंच पर लाने की अनुमति नहीं मिली।
.
उस वक्त जैसे ही पीएम मोदी को इस बात की जानकारी लगी, उन्होंने सुरक्षा प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए सुरक्षाकर्मियों से कहा कि उन्हें मोर मुकुट के साथ आने दो। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर मोर मुकुट पहना और उनसे आत्मीय संवाद भी किया। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है।
बिलाईगढ़ विकासखंड के चंदलीडीह गांव के रहने वाले रामनामी समाज सदस्यों ने बताया कि लोकसभा चुनाव में वे पीएम मोदी से मिले थे। अध्यक्ष सेतबाई रामनामी और महासचिव गुलाराम रामनामी ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान सक्ती जिले में प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई थी। तब सेतबाई ने वादा किया था कि जब वे दोबारा प्रधानमंत्री बनकर छत्तीसगढ़ आएंगे तो उनका मोर मुकुट पहनाकर स्वागत किया जाएगा।
रामनामी समाज के लोग बोले– आम चुनाव में वादा किया था कि फिर पीएम बने तो मोर- मुकुट पहनाकर स्वागत करेंगे
पीएम के प्रवास से कुछ घंटे पहले ही मिलने की व्यवस्था हुई: साय
रामनामी समाज और पीएम मोदी की मुलाकात के वीडियो को सोशल मीडिया में पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे भावनात्मक पल बताया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के रायपुर प्रवास से कुछ घंटे पहले मंत्रालय में रामनामी समुदाय के लोगों ने भेंट की। उन्होंने प्रधानमंत्री से मिलने की प्रबल इच्छा व्यक्त की।
इसके बाद सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाम ही जिनका धर्म, रामभक्ति ही जिनका कर्म है। कौन हैं रामनामी समाज के लोग गुलाराम रामनामी बताते हैं कि रामनामी एक विचारधारा है, हमारे पूर्वजों को मंदिर जाने से रोका गया, तब हमारे पूर्वजों ने अपने पूरे शरीर में राम नाम का गोदना गोदवा लिया। 1890 के आसपास रामनामी पंथ की शुरुआत परशुराम नामक युवक ने की थी।
<
