गुरुवार को नदी का जलस्तर बढ़ने से गांव बाढ़ की चपेट में आ गया और 40 से ज्यादा लोग फंस गए। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने नाव संचालन कर ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। कुछ ग्रामीण पानी के तेज बहाव के कारण पेड़ों में फंस गए थे, जिन्हें बचावक
.

शिवनाथ नदी किनारे एसडीआरएफ की टीम ने किया मॉकड्रिल।
राहत व बचाव कार्य का किया अभ्यास दुर्ग जिले में राज्य स्तरीय बाढ़ आपदा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। इस मॉकड्रिल का नेतृत्व जिला कलेक्टर और इंसीडेंट कमांडर एडीएम ने किया। शिवनाथ नदी के तट पर आयोजित इस अभ्यास में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने बाढ़ की स्थिति उत्पन्न होने पर राहत और बचाव कार्य कैसे किया जाता है, इसका सफल प्रदर्शन किया।

लोगों का रेस्क्यू कर उन्हें बाहर लाती टीम।
पुल टूटने की स्थिति से निपटने भी अभ्यास मॉकड्रिल के दौरान मानक स्थिति बनाई गई जिसमें पुल टूटने की स्थिति में किस प्रकार से राहत कार्य किया जाता है, यह भी मौके पर प्रदर्शित किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों और बचाव दल ने प्राथमिक उपचार और प्रभावितों को जिला अस्पतालों तक भेजने की प्रक्रिया भी अभ्यास के दौरान दिखाई। साथ ही बाढ़ बचाव केंद्रों में राहत कार्य, घायलों की देखरेख और डिप डाइविंग तकनीक का प्रदर्शन भी किया गया।

पेड़ों में फंसे लोगों को एसडीआरएफ की टीम ने बचाया।
तैयारियों का लिया जायजा इस मौके पर दुर्ग में पदस्थ वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे और उन्होंने पूरे कार्यक्रम का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि ऐसे मॉकड्रिल का मुख्य उद्देश्य आपदा की स्थिति में जिले के विभिन्न विभागों की त्वरित प्रतिक्रिया और आपसी समन्वय को परखना है।

बाढ़ में फंसे लोगों के पास पहुंची बचाव टीम।
ग्रामीणों में जागरूकता जरूरी जिला सेनानी एवं अग्निशमन अधिकारी नागेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि मॉकड्रिल के जरिए बाढ़ स्थिति आने पर बचाव कार्य में गति और दक्षता लाई जा सकेगी। यह अभ्यास ग्रामीणों में भी जागरूकता बढ़ाने का काम करेगा ताकि संकट की घड़ी में सभी मिलकर नुकसान को कम कर सकें।
<
