द ब्लेज ई न्यूज,जशपुरनगरः रफ्तार के कहर ने एक बार फिर एक जीवन को गंभीर संकट में डाल दिया। सड़क किनारे खड़े व्यक्ति को बेकाबू बाईक ने रौद दिया। दुर्घटना में घायल के पैरों में गंभीर चोट आई है। उपचार के लिए उसे रेफर कर दिया गया है। घायल और प्रत्यक्षदर्शियो के अनुसार दुर्घटनाकारित बाईक को एक नाबालिग चल रहा था। मामला सीटी कोतवाली थाना क्षेत्र के सन्ना रोड का है। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए राहुल भगत 26 वर्ष ने बताया कि शनिवार की रात लगभग 8 बजे वे अपने कैफे को बंद करके घर जाने के लिए सड़क किनारे खड़े हुए थे। इसी दौरान एक तेज रफ्तार बाईक अनियंत्रित हो कर उनके चपेट में ले लिया। पीड़ित के स्वजनों ने बताया कि इस बाईक को एक नाबालिग किशोर चला रहा था और एक पीछे में बैठा हुआ था। हादसे में इन दोनों किशोरों को भी चोट आई है। उन्हें उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गईं है। वहीं गंभीर रूप से घायल हुए राहुल को बेहतर इलाज के लिए स्वजन झारखण्ड के रांची ले गए हैँ। परिजनों का कहना है कि राहुल के दोनों पैरों की हड्डीयां बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुई है। हादसे के बाद जिला चिकित्सालय में देर रात तक गहमा गहमी की स्थिति बनी रही।

सख्ती के बाद भी सुधार नहीं –
जिले में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटना को देखते हुए पुलिस प्रशासन बीते एक साल से सख्ती कर रही है। पुलिस विभाग के आंकड़ों के अनुसार इस साल जनवरी से जून तक जिले में 271 सड़क दुर्घटनाओं में 186 लोगों की मौत और 126 लोगों के घायल होने के बाद शुरू की है। कार्रवाई के दौरान पुलिस प्रशासन ने नशे की हालत में वाहन चलाने वालों के साथ क्षमता से अधिक सवारी,बिना हेलमेट,बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाने वाले चालकों के विरूद्व लगातार चालानी कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने जनवरी से मई तक 81 सौ 34 प्रकरणों में 39 लाख 61 हजार 600 रूपये का अर्थदंड लापरवाह चालकों से वसूला है। इनमें नशे की हालत में वाहन चला रहे162 मामलों में 18 लाख 60,000 रूपये का अर्थदंड शामिल है। जशपुर पुलिस की इस सख्ती के बावजूद सड़क पर मनमानी का सिलसिला नहीं थम रहा है। बीती रात नाबालिग बाइक चालकों द्वारा किये गए हादसे ने वाहन को लेकर लोगों की गंभीर लापरवाही को उजागर किया है।

कानून सख्त करने की आवश्यकता –
नाबालिगों के हाथों में बााइक के हैंडल और कार की स्टेयरिंग थमाने की तेजी से बढ़ती प्रवृत्ति बढ़ते हुए सड़क दुर्घटना का एक बड़ा कारण है। इस समस्या से निबटने के लिए कानून तो है लेकिन इसे और सख्त करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है। जिला न्यायालय के अधिवक्ता सत्यप्रकाश तिवारी का कहना है कि पुलिस प्रशासन को कानून के अनुसार नाबालिग चालकों के अभिभावकों के विरूद्व अधिकतम दंडात्मक कार्रवाई की नीति अपनानी चाहिए। इसमें ऐसे मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत करना भी शामिल है। अधिवक्ता तिवारी का कहना है नाबालिग चालकों पर नकेल कसने के लिए कानून को सख्त करनी की आवश्यकता भी है,जिसमें वाहन को राजसात करने और लापरवाह अभिभावकों का लाईसेंस निरस्त करने जैसी कार्रवाई शामिल हो। इसके साथ ही शहर में स्पीड लिमिट और चौक चौराहों में सीसीटीवी सर्विलांस स्थापित करने की आवश्यकता भी है।

रील के चक्कर में फंसी युवा पीढ़ी –
सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता रामप्रकाश तिवारी का मानना है कि किशोरों में बढ़ते हुए स्टंट और रफ्तार के प्रति आकर्षण के लिए इंटरनेट मिडिया में चलने वाली रील विडियों बना कर लाइक और कमेंट बटोरने की प्रवृत्ति सबसे अधिक जिम्मेदार है। उन्होनें बताया कि इसके साथ ही शिक्षित अभिभावक भी संतान मोह में फंस कर इस तरह की गलती करते हैं। यह जानते हुए भी कि इसके परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

पांडे का मानना है कि संयुक्त परिवार के टूटने से भी इस तरह के सामाजिक दुष्परिणाम सामने आ रहा है। उनका कहना है कि पहले संयुक्त परिवार होने से सभी पर बुर्जगों का दबाव हुआ करता था। माता-पिता अपने बच्चों को इस तरह की छूट नहीं दे पाते थे,जिससे परिवार और समाज में अनुशासन बना रहता था। रामप्रकाश पांडे का कहना है कि इस समस्या से निबटने का एकमात्र रास्ता सख्त कानून है।
वर्जन –
‘घटना की सूचना मिली है। घायल की ओर से शिकायत मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।’
आशिष तिवारी,टीआई,सिटी कोतवाली,जशपुर।
