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शासकीय सुखराम नागे कॉलेज नगरी में इतिहास परिषद द्वारा शहीद वीरनारायण सिंह की पुण्यतिथि पर उनके बलिदान को याद कर सम्मान व श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उसके छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन कर पुष्पांजलि अर्पित की। प्राचार्य डॉ. मनदीप खालसा ने कहा शहीद वीर नारायण सिंह ने सोनाखान में अंग्रेजों के खिलाफ जो विद्रोह का बिगुल फूंका और गरीब आदिवासियों-किसानों की भूख से रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए, वह छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि समूचे देश में स्वाधीनता की अलख जगाई।
इतिहास विभागाध्यक्ष प्रोफेसर हितेषा नंद ठाकुर ने कहा शहीद वीर नारायण सिंह केवल एक व्यक्ति नहीं, एक विचार थे। 1857 के महाविद्रोह से पूर्व ही सन् 1856 में सोनाखान में उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ सशस्त्र विद्रोह किया। अंग्रेजों ने उन्हें 10 दिसंबर 1857 को फांसी दे दी, लेकिन उनकी चिंगारी ने पूरे छत्तीसगढ़ में स्वाधीनता की लौ प्रज्ज्वलित कर दी। आज जब हम एमए के पाठ्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम पढ़ाते हैं, तो वीर नारायण सिंह का बलिदान अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की प्रेरणा देती है। इस अवसर पर डॉ. अश्वनी कुमार ध्रुव, प्रो. आरआर मेहरा, प्रो. मोहित कुमार, प्रो. हितेषा नंद ठाकुर, डॉ. कविता, प्रो. लालमन बेरवंश, डॉ. ममता सौरज, उर्वशी साहू, डॉ. खेमचंद, डॉ. वेणु साहू, प्रमोद चौरे, सौरभ पाण्डे, सीता नेताम, नेहा राजन, डिलेश्वरी पटेल आदि उपस्थित थे।
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