देश में कई शहर भी ऐसे हैं जिनके नाम एक जैसे हैं, मगर वे अलग-अलग राज्यों में बसे हुए हैं। यह सुनने में जितना रोचक है, उतना ही चौकाने वाला भी है।
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हाल ही में हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में हुए भीषण लैंडस्लाइड ने एक बस को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में बस में सवार 16 यात्रियों की मौत हो गई। इस हादसे की खबर जब सोशल मीडिया और न्यूज चैनलों पर चलने लगी, तो छत्तीसगढ़ के लोगों में भी हलचल मच गई।
वजह थी बिलासपुर नाम! क्योंकि छत्तीसगढ़ की न्यायधानी भी बिलासपुर ही है। लोग एक पल को सोच में पड़ गए कि आखिर हादसा “अपने” बिलासपुर में तो नहीं हुआ? दरअसल, भारत में कई ऐसे शहर हैं जिनके नाम एक-दूसरे से मिलते हैं।
मसलन, रायपुर नाम का शहर सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही नहीं, बल्कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में भी है। यही नहीं, पटना नाम भी बिहार के अलावा राजस्थान और झारखंड में मिलता है। कोटा राजस्थान का एक प्रसिद्ध शहर है। जब भी इसकी चर्चा होती है तो छत्तीसगढ़ के कोटा का भी चित्र उभर आता है।
एक कोटा उत्तर प्रदेश में भी है। सीतापुर छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले का एक छोटा सा नगर है। इसी नाम का एक विधानसभा क्षेत्र भी है। ऐसा ही सीतापुर उत्तरप्रदेश, असम, राजस्थान और उत्तराखंड में भी है। नामों की यह समानता कई बार भ्रम की स्थिति भी पैदा कर देती है।
कुछ साल पहले उत्तरप्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस की घटना ने देशभर का ध्यान खींचा था, तब हरियाणा और पंजाब के गोरखपुर में रहने वाले लोग भी चौंक उठे थे। अगर नामों की यह सूची देखी जाए तो सीतापुर, राजगढ़, अहमदनगर, जयपुर, लखनपुर, और अमरावती जैसे शहर भी एक नहीं, दो या तीन राज्यों में मौजूद हैं।
जैसे अमरावती न केवल महाराष्ट्र में बल्कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश में भी बसा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समानता ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कारणों से बनी है। कई शहरों के नाम देवी-देवताओं, राजाओं या स्थानीय परंपराओं पर रखे गए, जो अलग-अलग इलाकों में लोकप्रिय होने के कारण बार-बार दोहराए गए।
कार्तिक पूर्णिमा के दिन राम सागर तालाब का नामकरण डा. मिश्र ने बताया कि राम सागर पारा मोहल्ले का नाम वहां स्थित एक तालाब राम सागर के नाम पर पड़ा। इसे बाद में रामसगरी तालाब कहा जाता है। कार्तिक पूर्णिका के दिन इस तालाब का नामकरण हुआ। यह देश का पहला तालाब है जो किसी साहित्यकार के नाम पर बस्तर राज परिवार ने रखा।
दरअसल साहित्यकार बस्तर भूषण पुस्तक के लेखक केदारनाथ ठाकुर के माता-पिता का इसी दिन रायपुर में निधन हुआ। तब उन्होंने बढ़ईपारा के पास एक तालाब खुदवाया। इसका नाम राम सागर पारा रखा गया।


राजा-राजवाड़ों के नाम पर शहर-नगरों के नाम : मिश्र इतिहासकार डा. रमेंद्रनाथ मिश्र ने बताया कि आमतौर पर प्रमुख शहर व गांवों के नाम राजा-सियासत के नाम पर रखे गए हैं। जैसे रायपुर का नाम कल्चुरी राजा ब्रह्मदेव राय के नाम पर पड़ा। कालांतर में एक शहर या नगर में रहने वाले लोग देश के अलग-अलग जगहों में बसने चले गए। उन्होंने अपने शहर की स्मृति बनाए रखने के लिए स्थानों का नाम रख दिया। इससे एक ही नाम के कई शहर या नगर हो गए।
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