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Home » Liquor scam… EOW said- Chaitanya got Rs 250 crore. | शराब घोटाला…EOW बोली- चैतन्य बघेल को 250 करोड़ मिले: सिंडिकेट को संरक्षण, अफसरों-कारोबारियों को गाइड किया, रायपुर कोर्ट में 3800 पन्नों की चार्जशीट पेश – Chhattisgarh News
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Liquor scam… EOW said- Chaitanya got Rs 250 crore. | शराब घोटाला…EOW बोली- चैतन्य बघेल को 250 करोड़ मिले: सिंडिकेट को संरक्षण, अफसरों-कारोबारियों को गाइड किया, रायपुर कोर्ट में 3800 पन्नों की चार्जशीट पेश – Chhattisgarh News

By adminDecember 23, 2025No Comments8 Mins Read
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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला केस में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के खिलाफ करीब 3800 पन्नों की चार्जशीट पेश की है। यह इस प्रकरण में 8वीं चार्जशीट है। EOW ने चार्जशीट में दावा किया है कि चैतन्य

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EOW ने चार्जशीट में दावा किया है कि सिंडिकेट के माध्यम से अवैध उगाही की राशि का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर चैतन्य बघेल से जुड़ा है। घोटाले में चैतन्य बघेल की सीधे संलिप्तता है। जांच में चैतन्य बघेल की भूमिका तत्कालीन समय में आबकारी विभाग में वसूली तंत्र (सिंडिकेट) को खड़ा करने और संरक्षक के रूप में पाई गई है।

जांच के अनुसार चैतन्य बघेल प्रशासनिक स्तर पर सिंडिकेट के हितों के हिसाब से काम करने वाले अनिल टुटेजा, सौम्या चौरसिया, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास जैसे अधिकारियों और सिंडिकेट के जमीनी मुखिया अनवर ढेबर, अरविंद सिंह, विकास अग्रवाल जैसे लोगों के बीच तालमेल बिठाने और उन्हें गाइड करने का काम करते थे।

चैतन्य बघेल 18 जुलाई 2025 से जेल में है। ये तस्वीर उनकी पेशी के दौरान की है।

चैतन्य बघेल 18 जुलाई 2025 से जेल में है। ये तस्वीर उनकी पेशी के दौरान की है।

घोटाले की रकम हाई लेवल तक पहुंचाई

EOW का दावा है कि चैतन्य बघेल, अनवर ढेबर के टीम की एकत्र की गई घोटाले की रकम को अपने भरोसेमंद लोगों के माध्यम से हाई लेवल तक पहुंचाने का काम कर रहे थे। चैतन्य बघेल ने त्रिलोक सिंह ढिल्लन के अलग-अलग फर्मों में अपने हिस्से की रकम लेकर बैंकिंग चैनल के माध्यम से अपने पारिवारिक फर्मों में प्राप्त किया। और उसका उपयोग निर्माणाधीन रियल स्टेट प्रोजेक्ट्स में किया।

इसके अलावा बड़ी मात्रा में अपने पारिवारिक मित्रों, सहयोगियों के जरिए घोटाले की रकम बैंकिंग चैनल के माध्यम से प्राप्त कर उसका निवेश करना पाया गया है। EOW के दावे के अनुसार चैतन्य बघेल को लगभग 200 से 250 करोड़ रुपए मिलने के साक्ष्य मिले हैं।

वहीं अब तक की जांच के आबकारी घोटाले की रकम लगभग 3074 करोड़ रुपए का होना पाया गया है। आगे की जांच में इस अवैध रकम के 3500 करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंचने की संभावना।

बता दें कि चैतन्य बघेल 18 जुलाई 2025 से जेल में है। वहीं 3 दिन पहले ED ने सौम्या चौरसिया को गिरफ्तार किया है। PMLA कोर्ट ने सौम्या चौरसिया को 14 दिन की रिमांड पर भेजा है। साथ ही पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास को भी अरेस्ट किया गया है।

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EOW-ACB ने दर्ज की है FIR, ED भी कर रही जांच

दरअसल, रायपुर EOW-ACB ने शराब घोटाला केस में FIR दर्ज की है। इसी FIR के आधार पर ED की टीम भी शराब घोटाले की जांच कर रही है। FIR में IPC और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराएं लगाई गई थीं। इसके बाद दोनों एजेंसियां जांच कर रही हैं।

EOW-ACB और ED की जांच में पता चला कि शराब घोटाले से छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ है। सिंडिकेट ने करीब 3000 करोड़ से ज्यादा की अवैध कमाई की है। ये पैसा नेता-मंत्री, कारोबारी और अफसरों में बंटा है। इनमें भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल का भी नाम है।

ED का दावा- चैतन्य के पास था नेटवर्क का कंट्रोल

ED की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के सर्वोच्च स्तर पर था। राजनीतिक प्रभाव के कारण नेटवर्क का कंट्रोल और फैसले लेने वाला व्यक्ति था। इकट्ठा की गई अवैध रकम का हिसाब भी रखता था। कलेक्शन, चैनलाइजेशन और वितरण से जुड़े सभी प्रमुख फैसले उसके डायरेक्शन पर लिए जाते थे।

ED ने बताया कि चैतन्य ने शराब घोटाले से कमाई की गई रकम को अपने रियल एस्टेट बिजनेस में लगाया। उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की। उसने यह पैसा अपनी फर्म एम/एस बघेल डेवलपर्स के तहत संचालित प्रोजेक्ट ‘विठ्ठल ग्रीन’ में लगाया।

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पहले भी हो चुकी है 215 करोड़ की कुर्की

ED ने 18 जुलाई 2025 को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले पूर्व IAS अनिल टुटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनवर ढेबर, आबकारी विभाग के अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी (ITS) और कवासी लखमा (पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक) को भी ईडी ने गिरफ्तार किया था। इनकी संपत्ति भी अटैच की गई थी।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रायपुर जोनल कार्यालय ने 10 नवंबर को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की चल रही जांच के संबंध में चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) किया है।

अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज

ईडी ने यह जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB)/आर्थिक अपराध शाखा (EOW), रायपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा दर्ज FIR के आधार पर शुरू की थी। यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की अलग-अलग धाराओं के तहत राज्य के शराब घोटाले के संबंध में दर्ज की गई थी।

पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से राज्य के कोष को भारी नुकसान हुआ और लाभार्थियों ने लगभग 2500 करोड़ रुपए की अवैध आय अर्जित की।

सिंडिकेट के नियंत्रक, अंतिम निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे चैतन्य

PMLA के तहत की गई जांच में यह सामने आया कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री के बेटे होने के कारण वे इस सिंडिकेट के नियंत्रक और अंतिम निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे।

वे सभी अवैध रूप से एकत्र किए गए धन का हिसाब रखते थे। सिंडिकेट द्वारा एकत्रित, चैनलाइज और वितरित की जाने वाली अवैध रकम (POC) से संबंधित सभी प्रमुख निर्णय उनके निर्देश पर लिए जाते थे।

ईडी की जांच में यह भी स्थापित हुआ कि चैतन्य बघेल खुद इस अवैध आय (POC) के प्राप्तकर्ता थे, जिसे उन्होंने अपने रियल एस्टेट व्यवसाय के माध्यम से लेयरिंग कर ‘वैध’ संपत्तियों के रूप में दिखाया।

उन्होंने शराब घोटाले से प्राप्त धन का उपयोग अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट “विठ्ठल ग्रीन” (जो कि उनकी स्वामित्व फर्म एम/एस बघेल डेवलपर्स के तहत संचालित थी) के डेवलपमेंट में किया।

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जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2500 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले का दावा है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

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A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला

A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन

2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।

B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना

  • डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई।
  • खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।
  • शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी।
  • डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।

……………………………

इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

शराब घोटाला…चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ की संपत्ति कुर्क:छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम के बेटे के खिलाफ ED का एक्शन; 364 प्लॉट अटैच

चैतन्य बघेल की तस्वीर पुरानी पेशी के दौरान की है।

चैतन्य बघेल की तस्वीर पुरानी पेशी के दौरान की है।

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियों में 364 आवासीय प्लॉट और कृषि भूमि के टुकड़े शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर….



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