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नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में रायपुर की विशेष अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। मामला थाना सिविल लाइन में वर्ष 2025 में दर्ज हुआ था, जिसमें पुलिस ने त्वरित जांच कर निर्धारित समय सीमा के भीतर चालान पेश किया था। पुलिस के अनुसार अपराध क्रमांक 264/2025 में आरोपी मनोज महिलांग के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने मजबूत साक्ष्य जुटाए और आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया। नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप साबित सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर आरोपी को दोषी पाया। इसके बाद न्यायालय ने आरोपी मनोज महिलांग को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। पीड़िता की पहचान गोपनीय रखकर हुई कार्रवाई पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरे मामले में पीड़िता की पहचान गोपनीय रखी गई और पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सिविल लाइन पुलिस ने प्राथमिकता के आधार पर विवेचना पूरी की। बाल अपराधों पर सख्त संदेश पुलिस का कहना है कि यह फैसला बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों पर सख्त संदेश देता है। नाबालिगों से जुड़े अपराधों के मामलों में पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत कार्रवाई जारी है। रायपुर पुलिस की अपील रायपुर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बच्चों के खिलाफ किसी भी प्रकार के अपराध, शोषण या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें। समय पर दी गई सूचना किसी बच्चे का भविष्य सुरक्षित कर सकती है।
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