छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले की ग्राम पंचायत मातला में सिकल सेल एनीमिया स्क्रीनिंग कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। यह पहल राज्य में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन की दिशा में की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में सिकल सेल रोग की पहचान,
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कार्यक्रम का शुभारंभ मातला के पंचायत भवन में हुआ। शिविर में कुल 205 लाभार्थियों की जांच की गई। इनमें से 3 व्यक्ति सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित पाए गए, जबकि 23 व्यक्ति वाहक (कैरियर) के रूप में चिन्हित हुए।
179 व्यक्तियों की रिपोर्ट नकारात्मक आई। ये आंकड़े ग्रामीण क्षेत्रों में सिकल सेल की गंभीरता को दर्शाते हैं, जिसके लिए निरंतर जन-जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता है।

परामर्श और जागरूकता सत्र लगाए गए
शिविर का संचालन चिकित्सा विशेषज्ञों, नर्सों, लैब तकनीशियनों और सहयोगी स्टाफ की एक टीम ने किया। जांच प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए एक मोबाइल टेस्टिंग वैन भी तैनात की गई थी।
ऑन-साइट परीक्षण के बाद, रोगियों और वाहकों के लिए परामर्श और जागरूकता सत्र आयोजित किए गए। इसमें चिकित्सकों ने सिकल सेल रोग की पहचान, लक्षण, बचाव के उपाय और जीवनशैली से जुड़ी सावधानियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी।
शिविर में स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी दी गई
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस पहल को सिकल सेल मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सरपंच मैनूराम वड्डे ने कहा, गांव में ऐसे स्वास्थ्य शिविरों से लोगों को बीमारी की जानकारी मिलती है और समय पर इलाज का अवसर भी मिलता है। हम चाहते हैं कि यह अभियान निरंतर चले और हमारे गांव सिकल सेल मुक्त बनें।
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