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राजधानी के संतोषी नगर की बेहद संकरी गली में नियमों को दरकिनार कर खोले गए अस्पताल में मरीजों से खुलेआम लूट हो रही है। केवल दो डॉक्टरों के भरोसे चल रहे एमआर अस्पताल को सुपर मल्टी स्पेशियलिटी बताकर गांवों के मरीजों को झांसा दिया जा रहा है।
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जहां दो कारें भी आमने-सामने से नहीं निकल सकतीं, उसी तंग मोहल्ले में मरीजों को आयुष्मान कार्ड से फ्री इलाज का लालच देकर लाया जाता है, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही असली ठगी शुरू हो जाती है।
दैनिक भास्कर को कई शिकायतें मिलने पर हेल्थ रिपोर्टर शुक्रवार को अस्पताल पहुंचे। जांच में पता चला कि अस्पताल ने एंबुलेंस ड्राइवरों और दलालों का पूरा नेटवर्क तैयार कर रखा है, जो गांव-गांव जाकर मरीजों को पकड़कर यहां लाते हैं। भर्ती होने के बाद परिजनों को कहा जाता है कि आयुष्मान नहीं चल रहा, पैसे दो वरना इलाज नहीं होगा। मजबूरी में लोग लाखों रुपए चुका रहे हैं, फिर भी मरीजों की हालत में सुधार नहीं हो रहा।
25 बेड के इस अस्पताल में सुविधाएं कम, सिर्फ 2 रेगुलर डॉक्टर ही संभाल रहे मरीज
भास्कर पड़ताल में पता चला कि 25 बेड का यह मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल महज दिखावा है। अंदर न आईसीयू की सही व्यवस्था है, न स्पेशलिस्ट डॉक्टर। सिर्फ दो रेगुलर डॉक्टर और कम स्टाफ के कारण अस्पताल में सन्नाटा है। मरीजों के परिजन बरामदे में रात गुजार रहे हैं और उन्हें मरीज की स्थिति तक नहीं बताई जा रही।
एंबुलेंस वाले भी करते हैं खेल रिपोर्टर: हमारा मरीज एम्स में एडमिट है। वहां इलाज करने से मना कर रहे। दूसरे अस्पताल ले जाना है। एंबुलेंस ड्राइवर: एमआर हॉस्पिटल बेस्ट है। यहां सब इलाज होता है। पैसा नहीं लगेगा सब कुछ फ्री में होगा। रिपोर्टर: फ्री में कैसे इलाज होगा। कोई भी अस्पताल मुफ्त में इलाज नहीं करता है। बाद में सब पैसा मांगते हैं। एंबुलेंस ड्राइवर: मरीज का पूरा इलाज से आयुष्मान कार्ड से होगा। एक पैसा नहीं लगेगा। आपको बस जाना है।
जमीन बेचकर दिए 2 लाख रुपए जशपुर की सुनीता (बदला नाम) ने बताया कि मैं तीन हफ्ते पहले दूर गांव से आई हूं। मेरे पति यहां भर्ती हैं। एक एंबुलेंस ड्राइवर ने बताया था कि ये अच्छा हॉस्पिटल हैं। सारा इलाज आयुष्मान से फ्री में हो जाएगा। लेकिन यहां आने के बाद इलाज के लिए जमीन बेच कर दो लाख जमा करने पड़े हैं। अब तक पति ठीक नहीं हुए हैं।
3 दिन में 50 हजार तक खर्च श्रुति (बदला नाम) ने बताया कि 5 दिसंबर से पिताजी एडमिट हैं। दो-तीन दिन में ही 40 से 50 हजार खर्च हो गए। एंबुलेंस ड्राइवर हमें लेकर आया था। बताया था कि आयुष्मान से इलाज फ्री हो जाएगा। लेकिन, खर्चा बढ़ता जा रहा है। अब कह रहे ऑपरेशन करना है। पैसा जमा करवा दो।
अस्पताल प्रबंधक ने स्वीकारा– आयुष्मान में पंजीकृत नहीं एमआर अस्पताल के प्रबंधक एसके मंडल ने बताया कि अस्पताल को खुले आठ महीने ही हुए हैं। यह स्वीकार भी किया कि हमारा अस्पताल अभी आयुष्मान योजना में पंजीकृत नहीं है। मरीजों का ठीक इलाज हो रहा है। यहां स्पेश्यिलिस्ट डॉक्टर ऑन कॉल रहते हैं। एंबुलेंस वालों से कोई सेटिंग नहीं है।
शिकायत मिली है, अब जांच करेंगे एमआर अस्पताल बिना आयुष्मान पंजीयन के चल रहा है। आयुष्मान से इलाज के बहाने मरीजों को लाकर गलत तरीके से पैसे वसूल रहे हैं तो इसकी जांच करेगें। गड़बड़ी मिलेगी तो सख्त कार्रवाई भी तय है। – मिथिलेश चौधरी, सीएमएचओ
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