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छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में हाथियों का एक झुंड अपने शावकों के साथ 3 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित एक झिरिया में पानी पीते और स्नान करते हुए नजर आया। यह मनमोहक दृश्य कुल्हाड़ीघाट परिक्षेत्र में लगाए गए ट्रैप कैमरे में कैद हुआ है। जंगल के बीच पानी में मस्ती करते हाथियों और उनके शावकों का यह दुर्लभ नजारा वन्यजीव संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। जानकारी के अनुसार, ट्रैप कैमरे में रिकॉर्ड हुए इस दृश्य में दो अलग-अलग दलों के कुल छह हाथी दिखाई दिए। इनमें शावक भी शामिल थे, जो पानी में खेलते, स्नान करते और किनारे की मिट्टी पर अठखेलियां करते नजर आए। यह दृश्य न केवल वन्यजीवों की स्वाभाविक गतिविधियों को दर्शाता है, बल्कि जंगल में जल स्रोतों की उपलब्धता के महत्व को भी उजागर करता है। देखिये यह तस्वीरें जल संकट के बीच जीवनदायिनी बनी झिरियाएं उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व ने जंगलों में जल संकट से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर जल संवर्धन अभियान चलाया है। भूमिगत जल प्रवाह को संरक्षित करते हुए अब तक 800 से अधिक झिरियाओं का निर्माण किया गया है। इसके अलावा, वर्षभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए 34 सौर ऊर्जा संचालित पंप भी स्थापित किए गए हैं। वन विभाग का मानना है कि गर्मी के मौसम में ये जल स्रोत वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा का काम करते हैं। पर्याप्त पानी मिलने से वन्यजीव जंगल के भीतर ही रहते हैं और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर उनका रुख कम होता है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाएं भी घटती हैं। 100 से अधिक गांवों की सुरक्षा से भी जुड़ा है अभियान उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व केवल हाथी, बाघ, तेंदुआ और दुर्लभ वन भैंस जैसे वन्यजीवों का ही आश्रय स्थल नहीं है, बल्कि इसके भीतर और आसपास 100 से अधिक गांव भी बसे हुए हैं। ऐसे में जल संरक्षण की यह पहल वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने की तैयारी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और संभावित सुपर एल-नीनो जैसी परिस्थितियों को देखते हुए जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में ही पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के लिए झिरियाओं का निर्माण और सौर ऊर्जा संचालित पंपों का संचालन लगातार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए नियमित निगरानी और गश्त भी बढ़ाई गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को रोका जा सके और वन्यजीवों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। संरक्षण और सहअस्तित्व की प्रेरक मिसाल कुल्हाड़ीघाट की झिरिया में हाथियों और उनके शावकों का यह दृश्य एक बार फिर साबित करता है कि समय रहते किए गए संरक्षण और आवास प्रबंधन के प्रयास जंगलों को जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से मुकाबला करने में सक्षम बनाते हैं। यह केवल वन्यजीव संरक्षण की कहानी नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व की एक प्रेरक मिसाल भी है। गर्मी के चरम समय में पानी से भरी हर झिरिया वन्यजीवों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। यही कारण है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व संरक्षण और जनकल्याण के बीच संतुलन कायम करते हुए लगातार ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ा रहा है।
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