कोटा सीएचसी की लचर व्यवस्था और एंबुलेंस में देरी से सर्पदंश से 7 वर्षीय बच्ची की मौत, सीपत में किसान की भी जान गई


कोटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की लचर व्यवस्था और एंबुलेंस मिलने में हुई देरी के चलते सर्पदंश से 7 वर्षीय बच्ची रायना की मौत हो गई। बिल्लीबंद निवासी रायना को बुधवार तड़के सांप ने डस लिया था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे कोटा सीएचसी ले गए, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे तत्काल सिम्स रेफर कर दिया।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के बाहर एंबुलेंस खड़ी होने के बावजूद कर्मचारियों ने उसे ले जाने से मना कर दिया और रतनपुर से दूसरी गाड़ी बुलाई। एंबुलेंस का इंतजार करने में एक घंटे से ज्यादा का समय बर्बाद हो गया।
इधर, सीपत के थाना पारा निवासी किसान रामकुमार धीवर (65) की भी सर्पदंश से जान चली गई। गुरुवार तड़के करीब 4 बजे कोठार स्थित बाथरूम जाते समय सीढ़ी के पास उन्हें सांप ने डस लिया था। सांप काटने का अहसास न होने पर वे वापस आकर सो गए। सुबह 6 बजे सीने में तेज जलन होने पर परिजन उन्हें तत्काल सिम्स लेकर पहुंचे, डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
सर्पदंश के लगभग 70 से 80 प्रतिशत मामले मानसून के दौरान ही सामने आते हैं। जून से अक्टूबर तक बरसात और खरीफ फसल की कटाई के वक्त ऐसी घटनाओं में तेजी आ जाती है। बिलासपुर जिले के अस्पतालों में हर साल सर्पदंश से होने वाली मौतों का औसत आंकड़ा 20 से 35 के बीच रहता है।
इस मानसून सीजन के शुरुआती दो महीनों में ही अकेले सिम्स में 25 से ज्यादा मरीज गंभीर हालत में भर्ती हुए, जिनमें से 13 मरीजों की जान जा चुकी है। जिले में सर्पदंश के सबसे ज्यादा मामले वन सीमा और कृषि बाहुल्य क्षेत्रों से आते हैं।
इसके अलावा मस्तूरी, सीपत और पचपेड़ी के ग्रामीण इलाकों में खेतों में काम करने के दौरान ‘रसेल वाइपर’ और ‘कोबरा’ के मामले अधिक सामने आते हैं। तखतपुर एवं बिल्हा क्षेत्र में अमूमन रात में जमीन पर सोने या अंधेरे में कोठार-बाथरूम जाने के दौरान सर्पदंश की घटनाएं अधिक दर्ज की जाती हैं।




