बिलासपुर में वन मंत्री केदार कश्यप ने विभाग की समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़कर 18 होने पर खुशी जताई। मंत्री कश्यप ने कहा कि अचानकमार सेंट्रल इंडिया का सबसे बड़ा पर्यटन हब बन सकता है, क्योंकि यहां तक
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बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को अचानकमार से लगे क्षेत्रों में बड़े सेलिब्रिटी बुलाकर कार्यक्रम आयोजित करने और प्रचार-प्रसार बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने तेंदूपत्ता संग्राहकों को दीपावली से पहले बकाया मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देशित किया।

इको-पर्यटन पर दिया जोर
केदार कश्यप ने इको-पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक विस्तृत कार्य योजना बनाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि बिलासपुर संभाग में देखने, घूमने और मनोरंजन के लिए कई आकर्षक केंद्र हैं, जिन्हें विकसित कर अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है। इन केंद्रों तक आसान पहुंच और बुनियादी सुविधाएं विकसित करने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और छत्तीसगढ़ की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ेगी।
मंत्री कश्यप ने चरण पादुका योजना पर भी बात की। उन्होंने निर्देश दिए कि अगले वर्ष लगभग 12 लाख पुरुष संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की जाएगी, जिसके लिए उनके पैरों का नाप जल्द मुख्यालय भेजा जाए ताकि खरीदी प्रक्रिया शुरू हो सके। राज्य सरकार ने हाल ही में बंद पड़ी इस योजना को फिर से शुरू किया है, जिसके तहत इस साल लगभग 12 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की गई है।

टूरिस्ट स्पॉट पर भी होंगे विकास कार्य
वन मंत्री ने कहा की तखतपुर के कोपरा जलाशय को रामसर साइट बनाने के कार्य में तेजी लाएं। इसी तरह संभाग के औरापानी, खुड़िया, कोटमी सोनार मगरमच्छ पार्क, गोमर्डा अभयारण्य, रामझरना रायगढ़, सतरेंगा कोरबा, बुका पिकनिक स्पॉट कटघोरा आदि अनेक दर्शनीय पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें विकसित कर लोगों के लिए और आकर्षण का केंद्र बनाया जा सकता है।
हमें हाथी के साथ रहने की आदत डालनी होगी
हाथी मानव द्वंद्व पर केदार कश्यप ने कहा कि हमें हाथी के साथ रहने की आदत डालना होगा। उन्हें उनके रहवास से दूर अन्यत्र भगाना नहीं है । लेकिन यह भी देखना होगा कि वह जनहानि या अन्य किसी तरह की हानि न कर पाएं, इसके लिए हमें स्वयं ही सचेत रहना पड़ेगा ताकि वे नुकसान न कर सकें।
वन पट्टे के आवेदनों का अंबार लगा
मंत्री ने वन पट्टा के नामांतरण और बंटवारा की प्रगति की भी समीक्षा की। संभाग के अंतर्गत इस तरह के 366 आवेदन मिले हैं जिसमें से केवल 84 का निराकरण किया गया है । उन्होंने लंबित सभी 280 मामलों के जल्द निराकरण के निर्देश दिए।
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