आदिवासी समाज और कांग्रेस नेता जीवन ठाकुर की संदिग्ध मौत के मामले में जीवन ठाकुर के बड़े बेटे नीरज ठाकुर और ग्राम मायना के पूर्व सरपंच शोप सिंह नेताम को जिला जेल से रिहा कर दिया गया है। रिहाई के बाद उन्होंने जेल के भीतर प्रताड़ना, अत्याचार और अमानवीय
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नीरज ठाकुर ने मीडिया को बताया कि उनके पिता जीवन ठाकुर और मामा को 12 अक्टूबर को एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद से ही जेल प्रशासन द्वारा उन्हें लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
नीरज के अनुसार, उनके पिता की तबीयत जेल में बार-बार बिगड़ रही थी। डॉक्टरों ने इलाज के नाम पर कई बार मोटी रकम की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी वे इलाज के लिए डॉक्टर के पास जाते थे, तो 40,000 रुपये तक की रिश्वत मांगी जाती थी। दवाइयां समय पर नहीं दी जाती थीं और न ही सही जांच की जाती थी। बार-बार इलाज मांगने पर डॉक्टरों ने उनके पिता को गाली-गलौज भी की और कहा कि पहले पैसे दो, फिर इलाज होगा।
नीरज ने जल प्रशासन पर लगाए आरोप
नीरज ने यह भी बताया कि जेल प्रशासन ने उन्हें और उनके पिता को अलग-अलग बैरक में रखा ताकि वे आपस में मिल न सकें। उनके मुताबिक, डॉक्टरों और जेलर द्वारा उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था। नीरज ने आरोप लगाया कि जब भी वे अपने पिता के लिए दवाइयां लेकर जाते थे, तो उन्हें बाहर खड़ा कर दिया जाता था और सबसे ज्यादा गाली-गलौज की जाती थी।

नीरज का आरोप- जेल में कैदियों से करवाते थे निजी काम
नीरज का आरोप है कि जेल में कुछ कैदियों से डॉक्टर अपना निजी काम करवाते थे। जिन लोगों को इलाज की कोई भी जानकारी नहीं थी, उनसे इंजेक्शन तक लगवाया जाता था। जेल का खाना भी बहुत खराब था- दाल और सब्ज़ी पानी जैसी होती थी और कई दिनों तक सिर्फ खिचड़ी दी जाती थी।
नीरज ने बताया कि उनके पिता की हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उनके पैरों और चेहरे में सूजन आ गई थी, पेट में दर्द रहता था और वे ठीक से टॉयलेट भी नहीं जा पाते थे। नीरज कहते हैं कि यह सब देखकर उन्हें बहुत दुख होता था, लेकिन जेल प्रशासन ने हर बार उनकी शिकायत को नजरअंदाज कर दिया।
बेटे ने कहा- पिता को रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट करने की नहीं दी गई जानकारी
नीरज ठाकुर बताते हैं कि जब उनके पिता को रायपुर सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया, तो उन्हें इसकी खबर तक नहीं दी गई। बाद में उन्हें पता चला कि 4 दिसंबर को जीवन ठाकुर की मौत हो गई है, लेकिन परिवार को यह जानकारी भी कई घंटों बाद मिली। नीरज ने दुख जताया कि वह अपने पिता से आखिरी बार भी नहीं मिल पाए।

पूर्व सरपंच ने इलाज के नाम पर पैसे मांगने का आरोप लगाया
जीवन ठाकुर के मामा और ग्राम मायना के पूर्व सरपंच, शोप सिंह नेताम ने भी जेल में हुए अत्याचारों के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब डॉक्टर इलाज करने आते थे, तब उन्हें और नीरज को अंदर नहीं जाने दिया जाता था। उनका कहना है कि इलाज के नाम पर पैसे मांगे जाते थे, और अगर कोई आपत्ति उठाता था तो सज़ा के तौर पर सिर्फ खिचड़ी दी जाती थी।
उन्होंने बताया कि जेल में कैदियों को चप्पल और बेल्ट से मारने की धमकी देकर डराया जाता था। उन्होंने यह भी बताया कि नीरज, जीवन ठाकुर और दूसरे परिजनों को अलग-अलग शेल में रखा गया और मिलने नहीं दिया गया। शोप सिंह का कहना है कि एक इंजेक्शन देने के बाद जीवन ठाकुर की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई थी।
पूर्व सरपंच का आरोप- कांग्रेस नेता जीवन की मौत के लिए जेलर और डॉक्टर जिम्मेदार
उन्होंने कहा कि जीवन ठाकुर की मौत के लिए जेलर और डॉक्टर पूरी तरह जिम्मेदार हैं। वे चाहते हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में किसी गरीब आदिवासी परिवार के साथ ऐसा हादसा न हो।
जीवन ठाकुर की मौत के बाद बस्तर और आदिवासी समाज में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। समाज के लोगों ने जिलाधिकारी को न्यायिक जांच की मांग का ज्ञापन दिया। इसके बाद चारामा थाना के सामने कई घंटों तक चक्काजाम किया गया और फिर पूरे बस्तर में एक दिन का बंद रखा गया।

पूर्व सीएम ने की परिवार से मुलाकात
इस दौरान कांग्रेस के कई बड़े नेता जीवन ठाकुर के परिवार से मिलने पहुंचे। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी परिवार से मुलाकात की और सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। दीपक बैज सहित अन्य नेताओं ने भी न्याय की मांग उठाई। कांग्रेस ने इस मामले की जांच के लिए एक टीम बनाई है, जो लगातार परिवार और समाज के लोगों से बात कर रही है।
जानिए क्या है पूरा मामला
दरअसल, मयाना गांव के ग्रामीणों ने चारामा ब्लॉक के कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे जीवन ठाकुर पर फर्जी वन पट्टा बनाने की शिकायत की थी। जांच में यह शिकायत सही पाई गई। जिसके बाद मौजूदा तहसीलदार सत्येंद्र शुक्ला ने उनके खिलाफ FIR दर्ज कराई।
उन्हें 12 अक्टूबर 2025 को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। प्रशासनिक कारणों से 2 दिसंबर 2025 को उन्हें कांकेर जिला जेल से रायपुर सेंट्रल जेल में शिफ्ट किया गया था।
कांकेर सहायक जेल अधीक्षक रेणु ध्रुव मुताबिक, 4 दिसंबर की तड़के जीवन ठाकुर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। जेल मेडिकल अधिकारी की सलाह पर उन्हें सुबह 4:20 बजे एम्बुलेंस से मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया। अस्पताल में सुबह 7:45 बजे उनकी जांच की गई और इलाज के दौरान गुरुवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया।
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