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शराब और अवैध कोयला परिवहन घोटाले की काली कमाई को वैध करने वाले कारोबारी राकेश जैन को ईओडब्ल्यू ने शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के ठिकाने से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और बड़ी संख्या में बैंक खाते जब्त किए गए हैं।
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राकेश शराब और कोयला घोटाले में फंसे आरोपियों के संपर्क में था। वो 10 प्रतिशत कमीशन लेकर ब्लैक मनी को व्हाइट करता था। फिर उसे अलग-अलग तरीकों से वापस लौटाता था। आरोपी ने अधिकांश रकम प्रॉपर्टी में निवेश की, जिसे एजेंसी ने जब्त कर लिया है।
आरोपी के खिलाफ कोतवाली थाने में ठगी का एक केस पहले से ही दर्ज है। अन्य शहरों में उसके खिलाफ 10 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें से कुछ मामलों में आरोपी ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत ली है। एजेंसी के मुताबिक मूलतः मुंबई निवासी राकेश जैन ने सीए की पढ़ाई की है। वह करीब नौ साल पहले रायपुर आया और गुढ़ियारी में किराए के मकान में रहता था। इस दौरान उसने कई लोगों से जालसाजी की, लेकिन पकड़ा गया।
उसी दौरान वह पिछली सरकार के प्रभावशाली लोगों के संपर्क में आया और उनकी काली कमाई को वैध बनाने का काम करने लगा। शराब और अवैध कोयला परिवहन घोटाले की पड़ताल के दौरान उसका नाम सामने आया था। लेन-देन से जुड़े दस्तावेज मिलने के बाद से ही एजेंसी उसकी तलाश कर रही थी।
शुक्रवार को उसको छापा मारकर गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी को आशंका है कि वह अन्य घोटालों में भी शामिल हो सकता है। पूछताछ के लिए उसे 19 दिसंबर तक रिमांड पर लिया गया है।
कपड़े का कारोबार बंद हुआ तब आया इस धंधे में| अधिकारियों के मुताबिक राकेश जैन सीए की पढ़ाई कर रहा था, लेकिन वह परीक्षा पास नहीं कर पाया। इसके बाद मुंबई में कपड़ों का व्यापार शुरू किया और कुछ अन्य कारोबार भी किए। लेकिन सफल नहीं हुआ। बाद में परिचितों के माध्यम से 2016 में रायपुर आया। यहां कुछ सीए से संपर्क बनाकर अवैध पैसे को वैध करने की स्कीम पेश करने लगा।
इसी दौरान उसके खिलाफ मामले दर्ज हुए और वह शहर छोड़कर चला गया। 2018 में वह कारोबारी सूर्यकांत तिवारी के संपर्क में आया, जिसके बाद अनवर ढेबर से मिला। दोनों के संपर्क में आने के बाद वह घोटाले के पैसे को अलग-अलग फर्जी कंपनियों के माध्यम से वैध करने लगा।
ऑटो-टैक्सी चालकों और ठेले वालों के नाम से खाते खोले, बनाई फर्जी कंपनियां
पुलिस और ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ है कि राकेश जैन ने रिक्शा, ऑटो-टैक्सी चालकों, सब्जी बेचने और पान ठेले वालों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए। उनके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियों का पंजीयन कराया। इन कंपनियों में करोड़ों का ट्रांजेक्शन दिखाया। दस्तावेजों में इन कंपनियों में प्रोडक्शन और सप्लाई भी बताई गई।
इन्हीं कंपनियों में भ्रष्टाचार और घोटालों के पैसे जमा हुए। फिर इन्हें एक नंबर में बदलकर कारोबारी अनवर ढेबर और सूर्यकांत तिवारी को भुगतान कर दिया गया। आरोपी ने कुछ आईएएस, आईटीएस और आबकारी अधिकारियों को भी पैसा दिया। इस तरह आरोपी ने लगभग 50 करोड़ रुपए को वैध किया। इसमें शराब घोटाले के 5 करोड़ और अवैध कोयला परिवहन से जुड़े 45 करोड़ रुपए शामिल हैं।
आरोपी से 52 से अधिक फर्जी कंपनियों के दस्तावेज जब्त किए गए हैं। जब्त दस्तावेजों में अधिकांश फर्जी कंपनियां कोलकाता में रजिस्टर की गई हैं। इसके अलावा मुंबई, दिल्ली और गुरुग्राम में रजिस्टर्ड कंपनियों की जानकारी भी सामने आई है। इन कंपनियों और उनके बैंक खातों की जांच जारी है।
इस तरह हुआ अवैध को वैध करने का खेल
- सुरक्षा गार्ड राजेश अवस्थी के नाम से आरए कारपोरेशन कंपनी खोली गई। इसी के नाम से पैसों का लेन-देन किया गया।
- मनीष शुक्ला के नाम से सोमवती ट्रेडर्स, महेंद्र वानकर की श्रृष्टि मिनरल कंपनी, सलीम अहमद की स्टार ट्रेडर्स कंपनी बनाई।
- फिर इन खातों में लेन-देन करने लगा।
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