राजनांदगांव लोकसभा सांसद संतोष पांडे ने 11 दिसंबर को संसद सत्र के दौरान खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने का मुद्दा उठाया।
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उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय भारतीय कला-संगीत की एक अद्वितीय पहचान है, जिसे उचित सम्मान मिलना चाहिए।
सांसद पांडे ने सदन को बताया कि इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय एशिया का पहला शास्त्रीय संगीत विश्वविद्यालय है।
यहां कथक, भरतनाट्यम और लोक संगीत सहित कई पारंपरिक कला विधाओं की उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान की जाती है। बड़ी संख्या में विदेशी छात्र भी भारतीय संस्कृति सीखने यहां आते हैं। इस पर विचार किया जाना चाहिए।

कला संगीत विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देने संसद में उठाया गया मुद्दा।
विकास और शोध गतिविधियों मिल सकती है नई दिशा
सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक प्रतिष्ठा के बावजूद विश्वविद्यालय को अभी तक केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं मिला है। यह दर्जा मिलने से इसके विकास और शोध गतिविधियों को नई दिशा मिल सकती है।
संस्थान की स्थापना 14 अक्टूबर 1956 को हुई थी और तब से यह भारतीय कला-संगीत विरासत के संरक्षण और संवर्धन का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित करने पर विचार की मांग
सांसद ने पीठासीन अध्यक्ष के माध्यम से केंद्र सरकार से आग्रह किया कि विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय घोषित करने पर गंभीरता से विचार किया जाए। उनका मानना है कि इससे इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और पकड़ और मजबूत होगी।
सांसद की इस मांग के बाद छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में चर्चा तेज हो गई है। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय दर्जा मिलने से कला-संगीत शिक्षा, शोध और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए अवसर खुलेंगे, जिससे खैरागढ़ को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक मजबूत स्थान मिलेगा।
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